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विदिशा नगर में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का 53 वा मुनि दीक्षा दिवस मनाया जाएगा

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर)-सम्मान दैने वाले का सम्मान वड़ता है, और अपमान दैनै वाले का पृकृति स्वं अपमानित कर देती है। मां ने कहा वेटा उठ जाओ वेटा मोह की निद्रा में पड़ा हुआ है,और वह उठ कर भी नहीं उठता है, और कभी मां की एक आवाज पर ही उठ जाता है उसी प्रकार जिनवाणी मां भी आपको मोह नींद से उठाने का प्रयास कर रही है, किसी का उपादान जल्दी जाग्रत हो उठता है, तो किसी को सही निमित्त मिलने पर भी उसका उपादान जाग्रत नही हो पाता

उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने किलाअंदर स्थित दि. जैन छोटा मंदिर में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि हर आत्मा में परमात्मा वनने की शक्ती है, लेकिन परमात्मा वनने में उस जीव का खुद का ही  पुरुषार्थ कार्य करेगा। यह ठीक है,कि निमित्त के विना उपादान काम नहीं करता आज तक जो भी सिद्ध वने है, या वन रहे हे, या आगे भी वनेंगे उनका उपादान किसी न किसी निमित्त से ही जाग्रत हुआ है। जैसे कुम्भ के निर्माण में माटी का योगदान है लेकिन यंहा कुम्मकार निमित्त हे।समाज में गुरू निमित्त हो सकते है, लेकिन उपादान तो आपका है। कभी कभी कमजोर निमित्त से भी उपादान जाग्रत हो सकता है।

उन्होंने आज की युवा पीड़ी को समझाते हुये कहा कि सूर्योदय का समय तो निश्चित है लेकिन किसी का सूर्य ८ वजे ऊगता है, तो कोई कोई तो १० वजे तक मोह की निद्रा में पड़े रहते है। मुनि श्री ने कहा कि डाल का चूका वंदर और आषाढ़ का चूका किसान यदि चूक गया तो अवसर हाथ से निकल जाता है।

मुनि श्री ने आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के 53 वे दीक्षा दिवस के संद्रभ में कहा कि जो आप कल देखेंगे उसकी चर्चा तो होगी लेकिन वह सन् 68 का समय नहीं होगा अजमेर नगर भी नही होगा। 2020 में विदिशा नगरी है और चर्चा तो होगी। मुनि श्री ने सदाचार की चर्चा करते हुये कहा कि सदाचार तो गृहस्थ के जीवन का विशेष गुण माना गया है, सदाचार में गृहस्थ का जीवन नैतिकता और शाकाहार से जुडा़ होकर जैन कुल का कुलाचार है।

उन्होंने कहा कि जन्म के साथ ही जैन कुल की मर्यादाओं को सुनिश्चित कर दिया जाता है, कि ये ये पावंदिया है, और उन कुलाचार का पालन करना अनिवार्य है, मुनि श्री ने कहा कि यदि कोई जैनकुल का पालन नहीं करता है, तो वह जन्म का ही जैनी है कर्म का जैनी नहीं, 

मुनि श्री ने कहा कि गृह त्यागी है, तो उसको इस प्रकार रहना होगा गृहस्थ है श्रावक है तो वह अपने श्रावकाचार का पालन करेगा और यदि वह मुनि आर्यिका है, तो वह मूलाचार का पालन करेगा। उन्होंने कहा संसार में रहने वाली सभी आत्माएं यदि नियमावली का पालन करती है तो वह भी सिद्ध हो सकती है।

 इस अवसर पर ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज ने कहा कि भगवान महावीर का समवसरण में भगवान की वाणी नही खिरी तो सभी लोग चिंतित हुये, इंद्र का सिंघासन ढोलने लगा तो सौधर्म इन्द्र ने पता लगाया जैसै सिंहनी का दूध विना स्वर्ण  पात्र के नहीं ठहर सकता उसी प्रकार समवसरण में विना गणधर के भगवान की वाणी को सामान्य श्रावक नहीं सुन सकते।जैसे महाभारत में संजय की अंतर दृष्टी से पूरे महाभारत का वृतांत सुना देते है।उसी प्रकार भगवान की वाणी को सिर्फ गणधर ही समझ सकते है।

मुनिसंघ एवं श्री शीतल विहार न्यास के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया जिन वंदना के अवसर पर आज दि. जैन छोटा मंदिर किलाअंदर में मुनि श्री के प्रवचन एवं आहार चर्या संपन्न हुई। इस अवसर पर छोटा जैन मंदिर के सभी ट्रस्टिओं एवं श्री शीतलनाथ सेवादल के सदस्यों ने तथा मुनिराजसेवासंघ किलाअंदर ने श्री फल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

25 जून गुरुवार को श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर विदिशा में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का 53 वा मुनि दीक्षा दिवस मनाया जावेगा। प्रातःकालीन वेला में 8 वजे से आचार्य श्री की संगीतमय पूजन होगी तत्पशचात मुनिसंघ एवं विद्वानों के द्वारा आचार्य श्री के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला जाएगा। श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर टृस्ट ने समाज वंधुओ से शोसल डिस्टेंस का पालन करते हुये मुंह पर मास्क लगाकर पधारने की अपील की है।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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