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33वां ज्ञानमय पावन वर्षायोग कलश स्थापना बारां में सम्पन्न

इस वर्षायोग में आप सभी अपनी जीवन शैली में कुछ न कुछ परिवर्तन करें : आचार्य श्री ज्ञानसागर

AHINSA KRANTI / AMIT JAIN

बारां, राजस्थान।  राष्ट्रसंत, सराकोद्धारक, शाकाहार प्रवर्तक, नवचेतना प्रदायक पष्टपट्टाचार्य परम पूज्य आचार्य 108 श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 33वां वर्षायोग कलश स्थापना राजस्थान के  बारां में 04 जुलाई की प्रातः विधि विधान के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदीप जी भैया (मंत्री राजस्थान सरकार) ने ध्वजारोहण करके किया, इसके उपरांत बारां की नन्हीं-नन्हीं बालिकाओं ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। बारां समाज के एवं बाहर से पधारे हुए श्रद्धालुओं ने पूज्यश्री के श्रीचरणों में श्रीफल समर्पित कर वर्षायोग हेतु संकल्प लिया। प्रथम कलश प्राप्त करने का सौभाग्य श्री मनीष जैन, पुत्र स्व. श्री शिखरचंद जी विवेक विहार दिल्ली,  द्वितीय कलश श्री भूषण कुमार अमित जी नितिन , जी पारस जी परिवार दिल्ली वालों को प्राप्त हुआ।

धर्म प्रभावना कलश का सौभाग्य श्री बालचंद, रमेश कुमार, विनीत कुमार पहाड़िया सूरत वालों को प्राप्त हुआ।इस अवसर पर आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने कहा कि 12 महीने में से 4 महीने निकालने पर 0 बचेंगे। यह सुनकर आप सोच रहे होंगे कि यह उत्तर तो गलत है, पर बात सही है। 12 महीने में से वर्षा ऋतु के चार महीने निकाल दें तो फिर फसल आदि कुछ नहीं होने से 0 बचेगा।उन्होंने कहा कि जीव-रक्षा की दृष्टि से यह वर्षायोग बहुत महत्वपूर्ण है। दिगंबर साधु, जीव रक्षा की दृष्टि से एक स्थान पर रहकर साधना किया करते हैं। | इस वर्षायोग में आप सभी अपनी जीवन शैली में कुछ न कुछ परिवर्तन करें। सम्यग्ज्ञान का अर्जन करें। अपने अपने बच्चों को भी गुरुओं के पास ले जाएँ। सभी सहनशक्ति का विकास करें। अपने-अपने घरों को आदर्श घर बनाएँ।संचालन ब्र. नितिन भैया जी खुरई ने किया। ब्र. अनीता दीदी, ब्र. मनीष भैया जी आदि ने अपने विचार रखे।

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