१६ दिवसीय श्री भक्तामर स्त्रोत महिमा आराधना शिविर का आयोजन हुआ शुरू

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 अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) – समवसरण में आकर के सभी की भावनाऐं, एवं कामनाएं पूर्ण होती है, उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम विदिशा में १६ दिवसीय श्री भक्तामर स्त्रोत महिमा आराधना शिविर के उदघाटन के अवसर पर व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि यंहा पर भी समवसरण के प्रतीक स्वरूप एक ऐसा अशोक वृक्ष लगाया गया है, जिसमें चारों और फल लगे हुये है, ऐसे फलदार अशोकवृक्ष के नीचे चारों और भगवान को  विराजमान किया गया है, उन्होंने कहा कि भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी का चिन्ह है कल्पवृक्ष और समवसरण में कल्पवृक्ष के नीचे जो भी जाता है, उसकी असीम इच्छाओं की पूर्ती विन मांगे ही होती चली जाती है।

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मुनि श्री ने कहा कि आचार्य भगवन् जब 2008 में विदिशा आए थे तो इस भूमी पर भगवान श्री शीतलनाथ का समवसरण हेतू अपना आशीर्वाद प्रदान किया। मुनि श्री ने कहा कि यह आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का कल्पवृक्ष है, और यंहा का अतिशय भगवान आदिनाथ स्वामी की प्राचीन प्रतिमा है, जो कि यंहा से भू गर्भ से प्राप्त हुई थी, एवं वह प्रतिमा और आचार्य गुरूदेव दौनों का आगमन एक ही साथ हुआ था। मुनि श्री ने कहा कि विगत दिनों से जो लोग यंहा आकर  भगवान का प्रातःकालीन अभिषेक और शांतिधारा कर भगवान की भक्ती कर रहे है, उनके अशुभ कर्म निश्चित करके टलेंगे, और यदि किसी कर्म के उदय से आप यदि गिरफ्थ में आ भी गये तो आपके वह अशुभ कर्म वहूत जल्दी टल जाऐंगे।

इसी भावना को लेकर48 दीवसीय 48 दीप भक्तामर का पाठ नित्य प्रतिदिन सांयकालीन  ६-४५ से चल रहा है, एवं १८-१०-२० कल से प्रतिदिन भक्तामर की महिमा आराधना के शिविर के रुप में १६ दिवसीय अर्थात ८ दिसंबर तक तीन काव्यों के साथ प्रतिदिन अर्थ सहित व्याख्या होगी। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं की तारीफ करते हुये कहा कि चातुर्मास कमेटी के कार्यकर्ता हों, या शीतलविहार न्यास टृस्ट कमेटी सभी ने पूर्ण स्वतंत्रता के साथ धर्म की इस आराधना हेतू संकल्प लिया है, प्रभावना के अंग विना वनाए ही वनते जा रहे है।उन्होंने टृस्ट कमेटी, और जैन समाज के सभी कार्यकर्ताओं की तारीफ करते हुये कहा कि यह चातुर्मास कोई साधारण चातुर्मास नहीं है,

कोरोना से वचाव करते हुये माक्स लगाकर दूरीओं के साथ सभी अनुशासित होकर भक्तामर पाठ की महिमा के साथ धर्म की आराधना करेंगे, यंहा पर सभी ब्रह्मचारीभैया से लेकर सभी कार्यकर्ताओं ने वहूत अच्छी संयोजना की है। अंत में उन्होंने सभी ओन लाईन प्रवचन एवं प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम से जुड़े सभी स्वाध्यायी और श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। एवं कल के दो प्रश्नों का जबाव देते हुये कहा कि तीर्थंकर भगवान ओम शव्द का उच्चारण नहीं करते है, वह सिद्ध परमेष्ठी को याद करते हुये  “नमः सिद्धैभ्या” कहकर अखंड मौन धारण कर लेते है, चुंकी उनकी छदमस्त अवस्था रहती है, इसलिये केवल्यज्ञान होंने तक कोई उपदेश आदि भी नहीं देते है, वर्तमान में हम मुनि जनों के पास शास्त्रों का आलंवन रहता है,इसलिये हम लोग आपको प्रवचन आदि सम्वोधित कर देते है।

श्री शीतलधाम के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया कि प्रातःकालीन वेला में ६:३० वजे से मंगलाष्टक केसाथ भगवान का अभिषेक करते हुये शांतिधारा मुनि श्री एवं ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज के मुखारविंद से संपन्न हुई। तत्पश्चात १६ दिवसीय भक्तामर महिमा आराधना की शुरुआत हुई। इस अवसर पर श्री सकल दि. जैन समाज एवं श्री शीतल विहार न्यास के पदाधिकारी एवं टृस्टीगणों ने दीप प्रज्वलन कर मुनिसंघ को श्री फल समर्पित किये। प्रतिदिन 8 वजे से 9 वजे तक तीन स्लोक के साथ स्वाध्याय कक्षा ओन लाईन चलेगी। मुनि श्री ने सभी स्वाध्यायी के लिये अपना आशीर्वाद प्रदान करते हुये एवं दो नये प्रश्न हल करने को दिये?

(१) आचार्यश्री मानतुंग महाराज ने  दि.जैन धर्म कंहा से स्वीकार किया?यह कहानी कंहा से जुड़ी है,और किस नाम से जुडी़ है, उस स्थान का नाम खोजकर आपको दैना है? (२) न्याय के क्षेत्र में प्रसिद्ध जिन आचार्य महाराज का वहूत प्रसिद्ध रहा है ऐसे न्यायाचार्य का नाम वताना है, जिसका पद्धानुवाद आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ने किया है, उनआचार्य का नाम आपको खोजकर दैना है।उपरोक्त दौनों प्रश्नो के उत्तर 9425684433 पर रात्री 8 वजे तक देकर स्वाध्याय का लाभ ले सकते है।सही उत्तर दैनै वाले सभी को मुनि श्री का आशीर्वाद मिलेगा।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा, मध्यप्रदेश
सम्पर्क – 7828782835 / 8989696947

श्री १००८ शीतलनाथ भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणको से सुशोभित भूमि भद्दलपुर, विदिशा (म.प्र.) स्थित निर्माणाधीन समोशरण मंदिर

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