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सावधानी से प्राचीन प्रतिमा का प्रछाल करना चाहिये प्रछाल करो लेकिन उसको घिसना नहीं चाहिये : मुनि श्री समता सागर जी महाराज

अहिंसा क्रांति / ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर)- जिधर जिधर तीर्थंकरों का विहार होता है,वंहा पर चारों ओर हरयाली और खुशहाली छा जाती है, यह आज कल की वात नहीं है,पुराने समय में किसानों की समृद्धि उसके यंहा के पशुधन से ही किया जाता था कि उसकेयंहा पर खेतीकितने वैलों की होती है, वह कितनी गाय औरभेंस आदि रखता है,

और राजाओं की समृद्धि का आंकलन उसके यंहा के हाथी, घोड़े, और उसके यंहां की स्वर्ण मुद्रा और धन धान्य के आधार पर की जाती थी, तीर्थंकर जंहा जंहा पर विहार करते है वंहा वंहा पर किसी भी प्रकार का रोग व्याधी नहींहोती मेघ कुमार देव सुगंधित जलकी वरसात करते है। उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम में प्रातःकाल ओन लाईन धर्म सभा में तीर्थंकरों के अतिशय वताते हुये व्यक्त किये।


उन्होंने कहा कि जैसेजैसे वर्तमान समय में शीतलधाम में विश्व शांति की कामना के साथ यह शांतिधारा निरंतर आगे वढ़ रही है, और सभी लोगों में धर्म वृद्धि कीभावना वड़ती जा रही है, यह भी शीतलधाम के भगवान श्री आदिनाथ के अतिशय का ही प्रभाव है, कि चातुर्मास काल वहूत ही अच्छे से चल रहा है, और नियमित शांतिधारा जाप अनुष्ठान सभी लोगों के स्वस्थ की कामना के साथ विश्व से कोरोना रोग से जल्दि ही मुक्ती मिले,

आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का स्वास्थ्य निरंतर प्रगति की ओर रहे जिससे हम और आप सभी उनका आशीर्वाद प्राप्त करते रहें, इसी भावना से यह कार्यक्रम निरंतर आगे वड़ रहा है,उन्होंने कहा कि तीर्थकरों का यही तोअतिशय है कि जंहा जंहा पर तीर्थंकर का विहार होता है, वंहा पर रोग मरिच्छ दुर्भिक्ष नहीं फैलता, चारों और हरयाली और खुशहाली रहती है। सुगंधित दृव्यों के साथ मेघ कुमार देव वर्षा करते है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जो शीतलधाम पर प्रतिवंध लगाए गये है, वह हमारी और आपकी सावधानी के लिये है,आप यदि सावधानी रखते है, तो धर्म लाभ और आहार दान दौनों का लाभ ले सकते है। मुनि श्री ने कहा कि जो व्यक्ति इस समय नियमावली के अनुसार अपना समय दे रहे है और जितना जितना धर्म लाभ उठा रहे वह पहले की आपेक्षा ज्यादा पुण्य कमा रहे है, और उतना उतना आनंद भी उठा रहे है।

पहले आपको प्रत्येक चतुर्दशी को ही भगवान श्री आदिनाथ स्वामी का अभिषेक और शांतिधारा का लाभ मिलता था, लेकिन किसी के पुण्य से कुछ ऐसा अवसर आया कि आजकल शीतलधाम में प्रतिदिन आपको अभिषेक और शांतिधारा का अवसर मिल रहा है। मुनि श्री ने कहा कि सावधानी से प्राचीन प्रतिमा का प्रछाल करना चाहिये प्रछाल करो लेकिन उसको घिसना नहीं चाहिये। उन्होंने कहा कि भक्ती के साथ विवेक का भी ख्याल रखना चाहिये।

शीतलधाम के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया प्रतिदिन चलने वाले प्रश्नोंत्तरीकार्यक्रम के प्रश्नों में प्रथम प्रश्न का उत्तर देते हुये वताया कि, मुनि श्री समयसागर जी महाराज का दूसरा चातुर्मास सन् 1990 कटंगी मध्यप्रदेश में मुनि श्री चिन्मय सागर जी एवं मुनि श्री उत्तम सागर जी महाराजके साथ हुआ था

दूसरे प्रश्न का सही जवाव आचार्य श्री ने दमोह के गृहस्थ श्रावक श्री देवचन्द्रजी को सन्1976 में कुन्डलपुर में 2 नवम्वर 1976 को क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की थी उस समय उनका नाम चारित्र सागर जी रखा था वर्तमान में उनकी समाधि हो चुकी है। जिन लोगो ने सही उत्तर दिये उन सभी को गुरूदेव ने अपना आशीर्वाद प्रदान किया।एवं कलके लिये दो प्रश्न दियेगये है।


(१)उस क्षेत्र का नाम वताना है, जो किसी तीर्थंकर के आगमन संद्रभ से जुड़ा है और आचार्य श्री ने उस क्षेत्र में मुनि दीक्षा भी उन्ही तीर्थंकर के हिसाब से दी हो।
(२)गुरुवर आचार्य श्री नेअपनी संघस्थ व्यवस्थाओं में दूसरीवार किस क्षेत्र से कितने महाराज जी का विहार कराया था उन सभी के नाम सहित संख्या को वताना है।।
-उत्तर पूर्ण हो आधा अधूरा उत्तरसही मान्य नहीं होगा आप अपने उत्तर रात्री 8 वजे तक ही 9425684433 पर मान्य होंगे।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

श्री १००८ शीतलनाथ भगवान के ४ कल्याणक से सुशोभित भूमि भद्दलपुर(विदिशा) स्थित निर्माणधीन समोशरण मंदिर

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