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सज्जन और दुर्जन व्यक्ति की पहचान उनके आचरण से होती है-साध्वी स्थितप्रज्ञा श्री


प्रतिभा मिलती है पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण-साध्वी संवेगप्रज्ञा श्री

AHINSA KRANTI NEWS
बाडमेर 23 सितम्बर। कोविड-19 के दौरान वर्षावास में चातुर्मास के दौरान स्थानीय दादावाडी़ परिसर लीलरिया धोरा सरदारपुरा में बुधवार को प्रवचन माला के दौरान साध्वी स्थितप्रज्ञा श्रीजी म.सा. ने सम्बोधित करते हुए कहा कि सज्जन और दुर्जन व्यक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सज्जनों में परोपकार, प्रिय वचन, प्रेम भाव, पराई प्रशंसा और प्रभावकता पाई जाती है। सज्जन और दुर्जन की पहचान उनके आचरण से होती है। आचरण के दर्पण में सज्जन एवं दुर्जन का व्यक्तित्व झलकता है। सज्जनों में परोपकार का भाव रहता है। दूसरों का उपकार करना दूसरे के भले की चिंता करना और अपनी सारी शक्ति लगा कर दूसरे की हित की रक्षा करना, यह सज्जनों की पहचान है। सज्जन लोग खुद तकलीफ झेल लेते हैं लेकिन दूसरों का उपकार करते रहते हैं।

उनका मन विराट होता है, जबकि दुर्जन स्वार्थ में लगे रहते हैं। सज्जन सुख-दुख में न कभी फूलते हैं और ना कभी फेल होतेरू सज्जन प्रिय वचन बोलते हैं। कभी भी अप्रिय वचन या कटु वचन नहीं बोलते। उनके मन में सभी के प्रति प्रेम का भाव रहता है। द्वेष का भाव नहीं रहता। द्वेष से क्लेश पैदा होता है और क्लेश से विद्वेष (बैर) पैदा होता है। प्रेम सबसे करो किंतु बैर किसी से मत करो। सज्जन दूसरों की प्रशंसा करते ही रहते हैं किसी के ज्ञान की, किसी के लय की, किसी के तप की तो किसी के कार्य की। सज्जनों का स्वभाव है अपनी निंदा और दूसरों की प्रशंसा करना। जबकि दुर्जन स्व प्रशंसा और दूसरों की निंदा में ही लगा रहता है।

सज्जन हर हाल में प्रसन्न रहता है। सज्जनों को स्वभाव मस्त रहने का होता है। सज्जन सुख-दुख में न कभी फूलते हैं और ना कभी फेल होते हैं। जो प्रस्तुतियों से प्रभावित होते हैं वे शूरवीर नहीं होते। सज्जन विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आप को सम बनाए रखते हैं। वे अपने जीवन में प्रभावक होते हैं। तन मन धन एवं जीवन सब सेवा के लिए मिला है।साध्वी संवेगप्रज्ञा श्री जी म.सा. ने कहा कि जो मिला है वह सेवा के लिए मिला है, तन मन धन एवं जीवन सब सेवा के लिए मिला है। हमें जीवन मद (घमंड) करने के लिए नहीं बल्कि लोगों की मदद करने के लिए मिला है।

ऐसा करने से विनम्रता आ जाती है।
प्रतिभा मिलती है पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण
प्रतिभा मिलती है पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण इसलिए उसके प्रति नतमस्तक रहो। ख्याति मिलती है परिवार एवं समाज के द्वारा इसलिए उसके प्रति आभारी रहो। ओछी मानसिकता और झूठा अहंकार मिलता है स्वयं के द्वारा इसलिए इसके प्रति सावधान रहो। अगर हम सज्जन प्रवृत्ति के मानव है तो हमारी सज्जनता का विकास होगा, विस्तार होगा, यदि दुर्जन प्रवृत्ति के हैं तो हमारी सज्जनता का नुकसान होगा।

सज्जनता के विकास में दो अवरोध हैं पहला ओछी मानसिकता और दूसरा झूठा अहंकार। गुरूवर्या भक्त बाबूलाल टी बोथरा ने बताया कि आगम ज्योति प्रवर्तिनी महोदया प.पू. सज्जन श्रीजी म.सा. की पटधर विदुषी सुशिष्या प्रवर्तिनी महोदया प.पू. साध्वी शशिप्रभा श्रीजी म.सा. की निश्रावर्तिनी स्वाध्याय निभरना प.पू. साध्वी सौमयगुणा श्रीजी म.सा., प.पू.साध्वी स्थित ्रपज्ञा श्रीजी म.सा. व संवेगप्रज्ञा श्रीजी म.सा. आदि ठाणा का चातुर्मास कोविड-19 में बाड़मेर की धर्मधरा पर आराधना भवन में स्वाध्याय व तपस्या के साथ चल रहा है और आज बुधवार को गुरूवर्या श्री को लीलरीया धोरा के जैन बन्धुओं की विनती स्वीकार करते हुए लीलरीया धोरा पधारे और प्रवचन माला का आयोजन किया गया और गुरूवर्या श्री का लीलरीया धोरा संघ द्वारा स्वागत किया गया। बोथरा ने बताया कि कोविड-19 के तहत प्रवचन में सभी के मास्क व सोशल डिस्टेन्स का ध्यान रखा गया।

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