भव्य आत्मा मे परमात्मा बनने की शक्ति है : मुनि श्री समता सागर जी महाराज

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अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) – संसार में कोई भी व्यक्ती किसी कि कितनी भी सेवा कर ले लेकिन वह उसे अपनी वरावरी परनहीं वैठाता लेकिन तीर्थंकर प्रभु अपने भक्तों से कह रहे है, कि आओ और हमारी वरावरी पर वैठो यह अधिकार एक मात्र जैन दर्शन ने प्राणीमात्र को दिया है, हर भव्यआत्मा में परमात्मा वनने की शक्तिहै,इतना वड़ा अधिकार और विना कोई कर्तित्व भावना के? आचार्य प्रवर मानतुंग स्वामी भक्तामरस्त्रोत्र में कह रहे है कि हे भगवन् इसमें आश्चर्य की क्या वात है, यह तो आपकी रीती नीति है, आप मेरे अवगुण न चितारौ, अपने विरद निहारौ। उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम में प्रातःकालीन १६ दिवसीय श्री भक्तामरस्त्रोत्र की विशेष कक्षा के चतुर्थ दिवस व्यक्त किये।

मुनि श्री ने कहा कि भक्त भगवन् से कह रहा है, कि हे भगवन् “में तो पापात्मा जीव हूं लेकिन आप तो संसार के सभी प्राणिओं को शरण दैनै वाले है, आप क्यू मेरे अवगुणों की और देखते हो? आप तो सभी को अपने समान वनाने की क्षमता रखते हो, जब आपके शासन में अंजन चोर निरंजन वन सकता है, तो आखिर में क्यों नही? तो उसका उत्तर देते हुये भगवन् कहते है कि दुनियाभर के क्लेश देखने जाओगे तो कभी आपको कभी शांती नहीं मिलेगी, सभी के प्रति मैत्रीभाव, और समता के परिणाम होंगे तभी आप सर्वोदय के इस सिद्धांत को अपना पाओगे कि हर प्राणी में, हर आत्मा में परमात्मा वनने की क्षमता है, लेकिन अभी तो आपकी वैटरी फुल चार्ज चल रही है,जब कभी आपकी वैटरी कमजोर हो तो उसको री चार्ज करने के लिये प्रभु और गुरू की शरण में आना आवश्यक हो जाता है।उन्होंने कहा किआचार्य मानतुंगाचार्य कहते है, कि इस प्रथ्वी पर रहकर जो व्यक्ती मन की पवित्रता से भगवान के सच्चे गुणों की आराधना करता है, वह परमात्मा वन सकता है।

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श्री शीतल विहार न्यास एवं चातुर्मास कमेटी के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया23अक्टूबर को भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक मुनि श्री समतासागर जी महाराज एवं ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज के सानिध्य में मनाया जाऐगा। विदिशा जैन धर्म के दसवे तीर्थंकर भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी की चार कल्याणक भूमी मानी जाती है, पूर्व नाम भद्दिलपुर भेलसा विदिशा में हीभगवान श्री शीतलनाथ स्वामी मां के गर्भ में आऐ थे यंही पर उनका जन्म भी हुआ तथा यंही पर उनका वाल्यकाल, शिक्षा संपन्न हुई,तथा वैराग्य धारण कर यंही पर देवों ने दीक्षा कल्याणक,मनाया और यंही परप्रभु को केवल्यज्ञान की प्राप्ती हुई। तत्पश्चात श्री सम्मेदशिखर जी से क्वार सुदी अष्टमी को मोक्ष पधारे।

शीतलधाम में मुनिसंघ के सानिध्य में प्रातःकालीन वेला में ६:३० वजे से अभिषेक एवं शांतिधारा वृहद शांतिमंत्रों के साथ मुनि श्री के मुखारविंद से होगी। तत्पश्चात नित्य नियम पूजन श्री शीतलनाथ भगवान का विधान ओन लाईन मुनि श्री के प्रवचन तथा प्रतिदिन चलने वाला प्रश्नोत्तरी का विशेष कार्यक्रम के पश्चात निर्वाण लाड़ू चड़ाया जावेगा। इस अवसर पर लाड़ू सजाओ प्रतियोगिता, एवं प्रश्नमंच का कार्यक्रम भी रखी गया है। श्री शीतल विहार न्यास टृस्ट श्री सकल दि. जैनसमाज एवं चातुर्मास कमेटी के समस्त पदाधिकारीओं ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है, कि प्रातःकालीन वेला में शीतलधाम हरीपुरा में पधारकर पुण्य लाभ अर्जित करें। शांतिधारा का कार्यक्रम ९:५० से १० वजे तक जिनवाणी चैनल पर प्रतिदिन दिखाया जा रहा है, एवं सांयकाल ५:२० पर सागर वूंद समाये पर मुनि श्री के प्रवचन चल रहे है।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा, मध्यप्रदेश
सम्पर्क – 7828782835 / 8989696947

श्री १००८ शीतलनाथ भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणको से सुशोभित भूमि भद्दलपुर, विदिशा (म.प्र.) स्थित निर्माणाधीन समोशरण मंदिर

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