भगवान की भक्ति पाप रूपी अंधकार को नष्ट कर सकती है : मुनि श्री समता सागर जी महाराज

- Advertisement -

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) – दुनिया अज्ञानता, आकृषण प्रलोभन और स्वार्थ के कारण चमत्कारों को नमस्कार करती है, चमत्कार तो मदारी, जादूगर भी कर सकते है, लेकिन अतिशय की घटनाएं वंही पर घटित होती है, जंहा पर एक सच्चा धर्मात्मा सदभावनाओं से भरकर प्रभु को याद करता है,उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम परिसर विदिशा में श्री भक्तामरस्त्रोत्र की कक्षा के तीसरे दिवस ओन लाईन धर्मसभा में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज मूकमाटी में कहते है, कि “जंहा दवा काम नहीं करती वंहा दुआ काम करती है”और  वही वात आचार्य श्री भक्तामरस्त्रोत्र के सांतवे काव्य में प्रभु की भक्ती करते हुये आचार्य मानतुंगाचार्य कह रहे है,

कि है भगवन् आपकी कथा करना तो वहूत दूर की वात है, आपका तो केवल नाम भर ले दिया जाए तो हमारे अंदर के सारे दोष नष्ट हो जाते है, जैसे कचड़े का ढेर कितना ही वड़ा क्यों न लगा हो उसे अग्नी की छोटी चिनगारी ही जलाकर राख कर देती है, ऐसे ही एक वार यदि हमारे अंदर सम्यक् दर्शन सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र रत्नात्रय रुपी छोटे से विशुद्धी के परिणाम आ गये तो वह अनादी के कर्म रुपी कचड़े का ढेर कितना ही वड़ा क्यों न हो,वह क्षणभर में नष्ट हो जाऐंंगा, उन्होंने उदाहरण देते हुये कहा कि रात्री में कितना भी सघन अंधकार हो प्रातःकाल सूर्य की एक किरण उस अंधकार को क्षण भर में ही नष्ट कर देती है, उसी प्रकार है भगवन् आपकी भक्ती पापरुपी सघन अंधकार को क्षण भर में नष्ट करने वाली है।

- Advertisement -

मुनि श्री ने कहा कि 64 रिद्धियां  सामान्य मनुष्यों को प्राप्त नहीं होती, यह उन्ही मुनिओं को प्राप्त होती है, जो कि प्रत्येक पल अपनी में भावनाओं में सदभावनाओं के साथ प्रभु का स्मरण करते हुये आत्मा के उद्धार  में सचेत रहते है। आचार्य मानतुंगाचार्य प्रभु की भक्ती में लीन प्रभु की प्रभुता के प्रभाव को स्पस्ट करते हुये कह रहे हे, कि मेरे पास में ज्यादा वुद्धी नहीं है, फिर भी में आपकी स्तुति कर रहा हूं, प्रभु में अपनी क्षमताओं को जानता हूं कि में तो आपकी भक्ती को करने के योग्य भी नहीं हूं फिर भी में यह दुस्साहस कर रहा हूं, जैसे सरोवर में कमल पत्र पर एक नन्ही सी ओसजल की वूंद पर सूरज की एक किरण मुक्ताफल के समान चमकती है। उसी प्रकार है भगवन्  आपकी स्तुती करने से मेरी यह छोटी छोटी शव्दावली भी सभी प्रकार के विघ्नों को नष्ट करने वाली है, मुनि श्री ने कहा कि भावनाओं में वहूत वड़ी शक्ती हुआ करती है, जंहा पर वड़े से वड़े यंत्र फैल हो जाते है, वंहा आत्मसाधना के ये मंत्र वहूत काम आया करते है,

उन्होंने ओन लाईन सुनने वाले सभी श्रद्धालुओं के साथ सभी उपस्थित श्रद्धालुओं और आम जनता को आशीर्वाद देते हुये कहा कि सदभावनाओं का फल कभी निश्फल नहीं होता १६ दिवसीय भक्तामरस्त्रोत्र और प्रभु की भक्ती का चमत्कार घटित हो या न हो लेकिन प्रभु की भक्ती का अतिशय तो निश्चित ही समझ में सभी के आ रहा है। चमत्कारों पर भले ही विश्वास मत करना लेकिन प्रभु की भक्ती में घटित अतिशयों पर अवश्य विश्वास करना ,अतिशय भावनाओं को व्यक्त करते है, दुनिया अज्ञानता और अज्ञानता के कारण आकृषण प्रलोभन और स्वार्थ के कारण चमत्कारों को नमस्कार करने लगती है, लेकिन सच्चा धर्मात्मा सदभावना से भरकर यदि प्रभु को याद करता है, तो वंहा पर भावनाओं के अतिशय स्वतः प्रगट हो जाया करते है। उपरोक्त जानकारी श्री शीतलधाम के प्रवक्ता अविनाश जैन ने दी

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा, मध्यप्रदेश
सम्पर्क – 7828782835 / 8989696947

श्री १००८ शीतलनाथ भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणको से सुशोभित भूमि भद्दलपुर, विदिशा (म.प्र.) स्थित निर्माणाधीन समोशरण मंदिर

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.