जैन समाचार

भक्ति से मुक्ति प्राप्त होती है -मुनि विहसन्त सागर

AHINSA KRANTI / ABHINANDAN JAIN NANDU

इटावा / विगत दो माह से शहर के बरहीपुरा जैन मंदिर मे चातुर्मास कर रहे जैन धर्म के बड़े मुनि मेडिटेशन गुरु 108 विहसन्त सागर जी महाराज के शहर भृमण के क्रम में विगत बुधवार से महाराज जी संसघ का अल्पवास सराय शेख जैन मंदिर मैं चल रहा है, जिसके दूसरे दिन मुनिश्री ने अपने आशीर्वचनो में  कहां की हमे भक्ति करते रहना चाहिए,लोगों ने भक्ति का स्वरूप ही बदल दिया है,भक्ति अंतरग से उत्पन्न होती है अब सिर्फ प्रदर्शन होता है।आगे उन्होंने कहा कि रावण की इतनी भक्ति शांतिनाथ भगवान के प्रति थी कि एक बार वीणा के तार टूटने पर अपने हाथ की नस ही लगा दी,भगवान से कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं है, भगवान की भक्ति करने वाले को कोई कभी भूखा नहीं कर पाता,और जिसका पाप कर्म का उदय होता है तो वो महलो में रहकर भी चैन का भोजन नहीं कर पाते ।

पूज्य मुनि श्री के पाद प्रक्षालन करने का अवसर आदिनाथ युवा सेवा समिति के अध्यक्ष संदीप जैन,प्रकाश चन्द्र जैन और उनकी पूरी टीम को मिला।कार्यक्रम मैं मुख्य रूप से जय प्रकाश जैन आनंद जैन महेश जैन किशन जैन सुभाष जैन प्रशांत जैन रिंकू जैन आशीष जैन पवन जैन कमलेश जैन जिनेंद्र जैन मनोज जैन दिलीप जैन सुनील जैन धर्मेंद्र जैन राहुल जैन सहित समाज के आधा सैकड़ा लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए रजत जैन ने बताया कि इस बार कोविड19 की वजह से चातुर्मास स्थल पर पूरे शहर की जैन समाज का एकत्रित नही किया गया बल्कि महाराज जी स्वंय इटावा के सभी जैन मंदिरों मैं पृथक पृथक जाकर धर्म की प्राभवना और जीणोद्धार कर रहे है, जिस से शासन द्वारा मिली गाइडलाइन और धर्म का पालन दोनों होता रहें।

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