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बंगाईगांव ( असम):- वर्षायोग निष्ठापन में 31 नवग्रह शांति विधान सहित त्रिदिवसीय कार्यक्रम का झंडारोहण के साथ शुभारंभ

अहिंसा क्रांति/रोहित कुमार छाबड़ा

बंगाईगांव(असम):-वर्षायोग निष्ठापन में 31 नवग्रह शांति विधान सहित त्रिदिवसीय कार्यक्रम का झंडारोहण के साथ शुभारंभ

आगामी 17 नवम्बर को वर्षायोग निष्ठापन एवं पिच्छीका परिवर्तन समारोह

बंगाईगांव।। सकलदिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आचार्य श्री 108 वर्धमानसागर गणनि आर्यिका श्री 105 सुपार्श्व मति माताजी की परम् शिष्या आर्यिका 105 गरिमामती माताजी आर्यिका 105 गम्भीरमति माताजी आर्यिका 105 रतनमती माताजी का चातुर्मास निष्ठापन (समापन) एवं पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आगाज विभिन्न आयोजनों के साथ धर्मप्रभावना पूर्वक आज शुरू हुआ। इस समारोह के दौरान जिनेन्द्र प्रभु के सम्मुख 31 मंडलीय नवग्रह शांति विधान पूजन का आयोजन किया जा रहा है। जिसका शुभारंभ आज आर्यिका माताजी के सानिध्य में झंडारोहण करके किया गया। आज झंडारोहण करने का परम सौभाग्य गुरुभक्त मोहनलाल प्रकाशचंद राजेश कुमार विकी कुमार जोनी बगड़ा परिवार को मिला।सकल दिगम्बर जैन समाज के प्रवक्ता रोहित कुमार जैन ने जानकारी दी 31 मंडलीय विधान में प्रमुख 4 विधान मंडलो में बैठने का सौभाग्य पवन जी सेठी परिवार, मनोज जी गंगवाल ( बरपेटा वाले), प्रकाश जी बगड़ा परिवार, अशोक जी पहाड़िया परिवार को मिला। प्रवक्ता ने बताया कि शहर स्थित 1008 शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर स्थित समारोह स्थल पर झण्डारोहण करने के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के महिलाएं तथा पुरुष उपस्थित थे।

आर्यिकारत्न गरिमामती माताजी ने कहा कि आगामी 17 नवम्बर को हमारे इस वर्षायोग का निष्ठापन कार्यक्रम व पिच्छी परिवर्तन कार्यक्रम समाज द्वारा आयोजित किया जायेगा वही उन्होंने कहा कि पिच्छी साधु-संतों के आचरण, संयम में परिवर्तन का बोध कराती हैं और चातुर्मास के यह चार माह धर्म आराधना के साथ-साथ हमारे जीवन के व्यक्तित्व में परिवर्तन को सुनिश्चित करते हैं। आर्यिका ने यह बात शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में चल रहे त्रिदिवसय वर्षायोग निष्ठापन एवं पिच्छीका परिवर्तन के पहले दिन झंडारोहण सहित विविध धार्मिक कार्यक्रमों में उपस्थित धर्म प्रेमियों को कही। उन्होंने कहा कि चातुर्मास धर्म आराधना का पर्व हैं और उसमें साधु संत से लगाकर श्रावक सभी मन में व्याप्त विकारों को दूर करने का प्रयास करते हैं और पिच्छी हमें यही संदेश देती हैं कि सार सार को ग्रहण करो। आत्मा पर छाये राग, द्वेष की धूल को साफ करें।

वही इससे पूर्व समाज के पदाधिकारियों द्वारा आज सुबह आचार्य निमंत्रण करके बहार से आमंत्रित पं. आसुतोष जैन व आर्यिका संघ को ठाट बाठ के साथ विधान स्थल पर लाए। समाज के अध्यक्ष विजय रारा, उपाध्यक्ष मिन्टू सरावगी, सुनील बगड़ा, मंत्री कमल पहाड़िया ने बताया भगवान की शरण में भव्यता दिखाने वाला ही भक्त ईश्वरीय पुण्य प्राप्त करता है। साथ ही वह अपने अच्छे कर्मों की फल की प्राप्ति भी करता है। उन्होंने कहा कि जहाँ भव्य विधानों की रचना होती है, वहां अकाल नहीं होता है। अपितु, सुकाल, धन, धान्य व पुण्य ही पुण्य होता है। प्रारम्भ में प्रतिष्ठाचार्य आसुतोष ने मंत्रोच्चारण के साथ झंडारोहण कराया व विधान मंडल का शुभारंभ कराया।कार्यक्रम से पूर्व आज श्रावकों ने शांतिनाथ भगवान का जला अभिषेक, व्रहद शांतिधारा करके मुख्य समारोह का शुभारंभ किया।

समाज के प्रवक्ता जानकारी देते हुए बताया कि गरिमा गम्भीर रतन पावन वर्षायोग कलश निष्ठापन एवं पिच्छी परिवर्तन समारोह में शुक्रवार, दिनांक 15 नवम्बर से रविवार 17 नवम्बर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे जिसमें आज 15 नवम्बर शुक्रवार को प्रातः 05:30 बजे कलशाभिषेक, शांतिधारा, नित्यनियम पूजन व ततपश्चात श्री व्रहद नवग्रह शान्ति विधान कार्यक्रम का ध्वजारोहण सहर्ष सम्पन्न हुआ वही आज व्रहद नवग्रह शान्ति विधान पूजन में बैठने वाले परिवारों की घोषणा की गई। 16 नवम्बर शनिवार को प्रातः 05:30 बजे कलशाभिषेक, शांतिधारा, नित्यनियम पूजन ततपश्चात श्री व्रहद नवग्रह शान्ति विधान पूजन प्राम्भ होगी व शाम को 06:30 बजे से श्रीजी, विधान व ससंघ आर्यिकारत्नो की आरती का कार्यक्रम होगा ओर ततपश्चातआज शाम 07:30 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम एवम वर्षायोग के चार कलशो के लक्की विजेताओं का लक्की ड्रॉ द्वारा चयन किया जायेगा। इस दौरान कल प्रातः मूलचंद जालान भवन में दिगम्बर समाज द्वारा अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई है। तथा 17 नवम्बर रविवार मुख्य कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः 05:30 बजे कलशाभिषेक, शांतिधारा, नित्यनियम पूजन ततपश्चात श्री व्रहद नवग्रह शान्ति विधान पूजन का समापन एवम मंत्रोउचारन द्वारा हवन होगा। वही दोपहर 01 बजे से गरिमा गम्भीर रतन पावन वर्षायोग कलश निष्ठापन एवं पिच्छी परिवर्तन समारोह के कार्यक्रमो का शुभारंभ किया जायेगा।

दिगम्बर समाज के अध्यक्ष ने इन सभी आयोजन में सभी पूर्वोत्तर के धर्मानुरागी बन्धुओ से अनुरोध एवं निवेदन कीया है कि सभी ज्यादा से ज्यादा संख्या में उपस्थित होवे व भव्य वर्षायोग निष्ठापन एवम पिच्छी परिवर्तन कार्यक्रम की प्रत्यक्षदर्शि बनके आर्यिकारत्नो के त्याग तपस्या की अनुमोदना करते हुए अधिक से अधिक धर्म लाभ लेवे।माज के पदाधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि बाहर से पधारे सभी धर्मावलम्बियों के 15 नवम्बर से 17 नवम्बर के लिए आवास व अल्पाहार, दोपहर भोजन व शायकालीन भोजन की समुचित व्यवस्था दिगम्बर समाज द्वारा उपलब्ध रहेगी। उन्होंने जानकारी दी कि इस भव्य कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक श्राविकाओं के आने की उम्मीद है जिसकी हमने पहले से तैयारियां कर रखी है।

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