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प्रत्येक अवस्था में परमात्मा का स्मरण करना चाहिए : साध्वी श्री राजमती म.सा

अहिंसा क्रांति


जोधपुर । 7 अक्टूबर महावीर भवन निमाज की हवेली में चातुर्मास हेतु विराजित महाश्रमणी श्री पुष्पवती जी म.सा. के सान्निध्य में प्रवचन, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण आदि धार्मिक गतिविधियाँ जारी हैं l आयम्बिल ओली जी के तृतीय दिवस धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए उपप्रवर्तिनी श्री राजमती जी म. सा. ने फरमाया -कर्मों का फल सभी को भोगना पड़ता है, मगर जो समभाव से भोगते हैं, वे निष्कर्म हो जाते हैं l जो राग -द्वेष करते हुए भोगते हैं, वे और ज्यादा कर्म बंध कर लेते हैं l इस लिए जब शुभ कर्म का उदय हो तब भी समभाव धारण करना चाहिए l प्रत्येक अवस्था में परमात्मा का स्मरण करना चाहिए, जैसे श्रीपाल जी सदैव नवपद का स्मरण करते हुए गुरुदेव के प्रति  कृतज्ञता भावपूर्वक नमन करते हैं l स्वेच्छा से समभाव पूर्वक सहन किया दुःख अपूर्व सुख का कारण बनता है l साध्वी डॉक्टर राजऋद्धि जी ने फरमाया – लोभ उस सरिता की तेज धारा के समान हैं, जो आगे बढ़ना जानती है, पीछे हटना नहीं l

ज्यों -ज्यों लाभ होता है, त्यों -त्यों द्रोपदी के चीर की तरह लोभ बढ़ता चला जाता  है l लोभ को पाप का बाप कहा गया है क्योंकि लोभ सभी सद्गुणों का नाश करता है l भौतिक पदार्थों की नश्वरता जानकर जो लोभ का त्याग कर देता, मन को वैराग्य की ओर मोड़ लेता है वह कपिल मुनि की तरह अपना कल्याण कर लेता है l  संघ मंत्री मुन्नालाल मुणोत ने कहा 8 अक्टूबर को विजयदशमी और आचार्य श्री भूधर जयंती का आयोजन है, सामायिक साधना का लक्ष्य रखें l  सामायिक करके महान विभूति को श्रद्धा सुमन समर्पित करें l

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