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पुण्य प्रबल हो तो जंगल में भी मंगल : मुनि पीयूषचंद्र विजय

AHINSA KRANTI NEWS

मुबंई । महानगर के कामाठीपुरा गली नं 8 में चल रही चातुर्मासिक आराधना के दौरान प्रवचन में मुनि पीयूषचंद्र विजय जी ने बताया कि पुण्य जिसके प्रबल हुआ करते है तो उनको जंगल में भी मंगल की प्राप्ति हो जाया करती है । उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान महावीर का जीव जब वह नयसार के रूप था तब उसे गुरूदेव जंगल में मिल गए । वहा धर्म में तत्पर रहने का एवं धर्म पालन करने का संदेश देकर चले गए ।यह उस नयसार का पुण्य प्रबल था कि जंगल में भी उसे ऐसे तारक गुरूदेव मिल गये । पुण्य नही हो तो गांव में आये हुए गुरूदेव भी बिना दर्शन दिए ही चले जाते है । हर मनुष्य को अपने जीवन में अच्छे कर्म करने का प्रयास करना ही चाहिए ।जिससे उसके पुण्य बढते ही रहे और पाप घटते ही रहे ।


जैन मुनि पियूषविजयजी म सा ने कहा कि सेठ पुत्र रूपसेन जो मरकर हाथी बन गया था, वह जंगल में उपद्रव कर रहा था । मगर उस जंगल में उस हाथी के भाग्य उदय का समय आया तो साध्वी सुनंदा ने जंगल में जाकर उस हाथी को शांत किया । साथ ही साथ धर्म का उपदेश भी दिया । अब वह हाथी अपने पूर्व भव देख सके, ऐसा ज्ञान प्राप्त करके उसने अपनी आत्मा का कल्याण किया । पुण्य वृद्धि दया, परोपकार, साधना, आराधना से होती है । इसलिए श्रेष्ठ उत्तम मानव जीवन में अधिक से अधिक हर जीवात्मा को अच्छे मन से, मन की पवित्रता से, मन की मलिनता को दूर कर सुंदर भावो के साथ धर्म करने में जुट जाना चाहिए । वर्ष भर में हमें मात्र चातुर्मास के चार माह ही धर्म आराधना करने के लिए समय मिलता है । इस दौरान हमें तप तपस्या कर कर्म खपाने का काम करने के लिए पूरी कौशिश करनी चाहिए । आगामी दिनों में आयोजित ओली आराधना के लिए तपस्वियों ने अभी से तैयारी प्रारम्भ कर दी है

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