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परमार्थ के क्षेत्र में व्यक्तित्व यदि कमजोर है, तो वह व्यक्ती प्रमाणिक नहीं माना जाता : मुनि श्री

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा (भद्दलपुर) – शरीर से कमजोर दिखने वाला व्यक्ती भी कभी कभी वहूत वड़े वड़े कार्य कर लेता है, और कोई हष्टपुष्ट व्यक्ती है, वह शरीर से भले ही वजनदार हो वह उस कार्य को नहीं कर पाता है, परमार्थ के क्षेत्र में व्यक्तित्व यदि कमजोर है, तो वह व्यक्ती प्रमाणिक नहीं माना जाता। उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम में ओन लाईन प्रवचन सभा में व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि वक्ता की प्रमाणिकता उसके वचनों से होती है। जव तक कोर्ट का फैसला नहीं आता तव सभी को संदेह रहता है, और डर भी वना रहता है, लेकिन फैसला आने के पश्चात दौनों ही पक्ष निशचित हो जाते है। उन्होंने कहा कि वाहर की कोर्ट में तो आप फिर भी वच सकते हो इस कोर्ट में नहीं अगली कोर्ट में चलो लेकिन तीर्थंकर की वाणी  कोई तर्क वितर्क नहीं चलता।

मुनि श्री ने कहा उसे मानना ही पड़ता है, और मानना भी चाहिये। कल के समाचार पत्रों में आचार्य श्री ने राष्ट्रीय भाषा हिंदी को लेकर कुछ कहा है और इस संद्रभ में अपने सुझावों को देश के प्रमुखों तक पहुंचा दिया  है, उन्होंने कहा कि “में किसी भाषा का विरोध नहीं करता लेकिन जिस देश की जो मूल भाषा है, उसका सम्मान तो होंना ही चाहिये, यदि वह देश अपनी मूल भाषा को ही भूल जाऐगा तो वह देश कमजोर हो जाता है, और वह प्रगति नहीं कर सकता।

आचार्य श्री ने उदाहरण देते हुये कहा कि एक सामान्य व्यक्ती को जज जब अपना फैसला देता है, वह सामान्य व्यक्ती उस भाषा को जानता नहीं तो वह पराश्रित हो जाता है, और कभी कभी तो स्वार्थ वश वकील भी उसको भटका देते है, इसलिये न्यायालय के सभी कार्य हिंदी भाषा में ही होंना चाहिये, जिससे सभी लोग जज के फैसले को समझ सकें। और भी जो मुख्य संसदीय कार्य है, उनमें प्रमुखता हिंदी को दी जानी चाहिये।

प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया मुनि श्री ने शीतलधाम विदिशा के निर्माण सम्वंधित चर्चा करते हुये कहा कि एक सपना होता है, जो वंद आंख का होता है, आंख खुली और वह सपना विस्मृत हो जाता है, और एक सपना वह होता है, जो खुली आंख से देखा जाता है। “अतीत की स्मृतियों को तो हम याद रखते है,और कभी कभी उसकी चर्चा भी करते है, लेकिन अनागत की परिकल्पना कर खुलीआंख से जो सपना संजोया जाता है,वह सपना आपकी भविष्य की परिकल्पना को उभारता है।

 उन्होंने कहा कि आचार्य गुरूदेव ने भी विदिशा में आकर एक खुली आंख का सपना देखा और उस सपने को शीतलधाम की इस कमेटी को तेजी के साथ पूर्ण भी करना है। उन्होंने कहा कि पूर्व की सभी कमेटीओं ने समयानुसार कार्य को आगे वड़ाया है, और वर्तमान कमेटी भी दिगंवरत्व की इस धरोहर को संजोने के कार्य में प्रण प्राण से जुटे हुए है,

उन्होंने कहा कि यह वंद आंख का सपना नहीं है,वंद आंख का सपना तभी तक रहता है, जव तक आपकी आंख वंद है, आंख खुलते ही आपका वह सपना चला जाता है, यह तो खुली आंख का सपना है इसको आप सभी विदिशा वालों को पूर्ण करना है। मुनि श्री ने कहा कि संस्थान से सम्वंधित आपका जो भी दान है, वह आपको समय पर दैना चाहिये, जिससे कार्य में व्यव्धान न आऐ। और आपके दिये गये दान से सही समय पर सही उपयोग हो सके,

मुनि श्री ने भगवान के अनंतज्ञान, अनंत दर्शन, अनंत सुख और अनंत वीर्य की चर्चा करते हुये कहा कि  मुनि श्री ने कहा कि हम जैसे संसारी प्राणियों के जैसा कोई भी प्रयोग अरिहंत परमेष्ठियों को नहीं करना पड़ता वंहा तो कार्य स्वमेव होते चलेजाते है। हमारा ज्ञान मोह के कारण पदार्थ से जुड़ता है, जो कि हमें पीड़ा देता है, लेकिन अरहंतों के कैवल्य ज्ञान में सवकुछ स्पस्ट झलकता है।क्यू कि उन्होंने मोह रुपी अज्ञान से मुक्त हो चुके है।और तीनों काल की घटनाएं उनके ज्ञान में शक्ती के रुप में पृकट हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि गुणों की संवेदन शीलता ज्ञान है, और ज्ञान ही सभी पदार्थों को जानता है, ज्ञान से ज्ञान की वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि अनंत सुख और अनंत शक्ती तो सभी अंदर मौजूद है, लेकिन अन्तराय कर्म के कारण वह प्रगट नहीं हो पा रही है, उस शक्ती को प्रकट करने के लिये ही यह उपदेश दिया जा रहा है।

प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया दौपहर को ३:४५से आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के”चैतन्य चंद़ोदय शतक” जो कि आचार्य श्री ने स्वं संस्कृत में लिखी है, उसका स्वाध्याय मुनि संघ के सानिध्य में प्रारंभ हो गया है, उसमें भी अनंत चतुष्टय की ही चर्चा चल रही है। जिसमें सभी लोग भाग ले सकते है।

सांयकाल 6:15 से गुरु भक्ती एवं 6:45 से 48 दिवसीय श्री भक्तामर महापाठ 48 दीपों के माध्यम से मुनि श्री के मुखारविंद से किया जा रहा है, जिसमें सभी श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है। आज का आयोजन नन्ही देवरी के राजाराम जी एवं ब्र. वहन बबीता जी तथा ब्र. भैया श्री दिलीप जी के परिवार की ओर दीप प्रज्वलित किये जाएंगे।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

श्री १००८ शीतलनाथ भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणको से सुशोभित भूमि भद्दलपुर, विदिशा मध्यप्रदेश स्थित निर्माणधीन समोशरण मंदिर

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