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नये युग को आह्वानन, नम्बर एक का लेबल नहीं,नम्बर एक का काम करो – विराग सागर जी महाराज

AHINSA KRANTI NEWS / SONAL JAIN

भिण्ड। परमपूज्य राष्ट्रसंत गाणाचार्य १०८ श्री विराग सागर जी महाराज ने अपने मंगलमय उद् बोधन में कहा – सम्यक दर्शन ही सबसे महत्वपूर्ण है बढ़ना समझना और लिखना इतना जरूरी नहीं जितना परमात्मा धर्म या गुरु में विश्वास जरूरी है आराधना विश्वास के बल पर होती है भेद विज्ञानी के आगे 11 अंग नो पूर्व का ज्ञाता भी तुच्छ है। कोरा ज्ञान कीमत नहीं रखता न्यायाचार्य माणिक्यनन्दी ने कहा हितकर कार्य करें जिससे उपलब्धि मिले अध्ययन से सम्मान ब रकम मिलेगा प्रशंसा के लिए किया गया कार्य सफलता नहीं देता धर्म का स्वाद व आनंद श्रद्धालु ही ले सकता है दृष्टि व श्रद्धा सही रखें तो परमात्मा मिलेंगे नंबर वन का लेवल लगाने से वस्तु नंबर दो की ही रहेगी नंबर एक की नहीं हो जाएगी अनपढ़ भी पढ़े लिखों से ज्यादा सम्मान पा सकता है

बरसों लगते हैं विश्वास जमाने में पर तोड़ने में एक क्षण भी नहीं सम्यक दृष्टि की यही भावना रहती है अंत समय में भगवान को ना भूल जाऊं शब्द रटते रहने से भाव सुधर नहीं पाते बार-बार भावना भाने से कार्य पूरा होता है गुरु आज्ञा शिरोधार्य करने वाला मोक्ष नियम से पाता है सारी कला विद्या ज्ञान प्रतिभा उपलब्धि गुरु भक्ति व सेवा से सर्व सुख मिलते हैं कमजोर व्यक्ति विचलित होते हैं चर्या वान ही चर्या वानों को जोड़ने वाला है उत्साह से उत्साह बढ़ता है उदासी व निराशा या नेगेटिव थिंकिंग से कभी मन मस्तिक नहीं भरना पढ़ो पर मन में उतारो तभी पढ़ना सार्थक है नए युग को आह्वान करते हैं कि कदमों में इतनी ताकत भरे कि कांटे भी चुभे तो उफ़ ना करते हुए रास्ते पर चलें और अंत में निर्वाण प्राप्त कर लें।

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