breaking news मुख्य समाचारJain Newsकार्यक्रमजैन मंदिरजैन साधू, जैन मुनि, जैन साध्वी

जैन धर्म मे मृत्यु महोत्सव मनाये जाते हैं जैनाचार्य विनीत सागर/ अहिंसा क्रांति अखबार


 अहिंसा क्रांति अखबार

कामां । अन्य वर्ग व समुदाय में जन्मोत्सव के आयोजन किये जाते हैं लेकिन जैन आगम के अनुसार जैन धर्म मे मृत्यु महोत्सव का आयोजन किया जाता है प्रत्येक मानव की यही भावना होनी चाहिए कि मेरी अंतिम मरण समाधि मरण के रूप में हो, यही सम्यक्त्व संलेखना होती है उक्त उदगार विजयमती त्यागी आश्रम में रविवार को प्रातः आर्यिका विश्व श्री माताजी की श्रद्धांजलि सभा मे जैनाचार्य विनीत सागर महाराज ने जैन श्रावक श्राविकाओं से कहे ।जैनाचार्य ने कहा कि की जिस प्रकार मन्दिर मूर्ति और शिखर के बिना अधूरा है,

शिखर कलशारोहण के बिना अधूरा है उसी प्रकार जीवन वैराग्य के बिना अधूरा है और वैराग्य शिखर पर कलशारोहण की तरह उत्तम समाधि के बिना अधूरा है जैनागम के अनुसार कषायों के कृष के साथ साथ शरीर का शनै शनै कृष करना सम्यक्त्व संलेखना कहलाता है । वर्षायोग समिति के कोषाध्यक्ष देवेंद्र जैन मुनीम ने अवगत कराया कि आर्यिका विश्व श्री माताजी को श्रद्धांजलि देने हेतु विनियांजली सभा का प्रारम्भ आर्यिका के चित्र के समक्ष बड़जात्या परिवार , जैन समाज एवम वर्षायोग समिति के पदाधिकारियो द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया

तो वही आर्यिका के जीवन पर संजय सर्राफ, सत्येन्द्र जैन, उत्तम चन्द बड़जात्या, पदमचंद जैन , रिंकू बड़जात्या , मनीषा जैन सर्राफ ने प्रकाश डाला तो सन्चालन करते हुए वर्षायोग समिति के मीडिया प्रभारी संजय जैन बड़जात्या ने कहा कि आर्यिका विश्व श्री माताजी का बचपन कामां में श्योकरन दास बड़जात्या के घर व्यतीत हुआ और परिवार के संस्कारों से जैनेस्वरी दीक्षा ग्रहण की जिससे कामां व बड़जात्या परिवार का गौरव बढ़ा है । कार्यक्रम में महिलाएं , पुरुष , बच्चों ने णमोकार महामन्त्र का जाप्य व कार्यक्रम के अन्त में मौन रखकर आर्यिका श्री को श्रदांजलि दी ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Close