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जीवन में आध्यात्मिक ज्ञान जरूरी : मुनि पीयूषचंद्र विजय


मुबंई  ।
महानगर के कामाठीपुरा गली नं  8  में चल रही नवपद ओली आराधना के दौरान प्रवचन में  मुनि पीयूषचंद्र विजय जी ने बताया कि  नवपद ओली आराधना के सातवें  दिन मानव जीवन  को  सप्त भय  एवं सप्त व्यसन से बचाने वाला अगर कोई तत्व है, तो उस तत्व का नाम है नवपद ।  आराधक  अपने  मानव जीवन को परम सुख की ओर ले जाने की चाहत रखता है तो वह श्रेष्ठ मार्ग है । आध्यात्मिक का याने ज्ञान से जुड़कर सब कुछ सहज रूप से प्राप्त किया जा सकता है । उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दशपुर नगर में रूद्र सोमा नाम की एक श्राविका रहती थी । उसका  पुत्र आर्य रक्षित व्यवहारिक पढ़ाई ज्ञान प्राप्त कर जब नगर में आया तो नगर के  राजा सहित सभी नगर जानो  ने सम्मान कर प्रसन्नता जाहिर की । मगर आर्य रक्षित की माँ खुश नही हुई । तब पुत्र ने माँ से पूछा कि माँ आप खुश नही हो क्या  कारण है । तब माँ बोली, बेटा यह ज्ञान तुम्हे शोहरत, इज्जत, धन, दौलत, प्रसिद्धि दे सकता है ।

मगर आध्यात्मिक ज्ञान  इस लोक ओर परलोक के दोनो सुख देने के साथ-साथ आत्मा का कल्याण कराने में परम सहायक है । ऐसे आध्यात्मिक ज्ञान  दृष्टिवाद की तुम पढाई  करो । यही मैं  चाहती हूँ । आर्य रक्षित ने अपनी माता की भावना पूर्ण करने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान दृष्टिवाद पढने के लिए सदगुरू के पास गया । उसने  गुरु से कहा, मुझे दृष्टि वाद की पढ़ाई करना है, तो गुरूदेव बोले  इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए तुम को दीक्षा लेनी होगी । तभी तुम यह पढाई कर सकते हो, तब उस पुत्र ने अपनी माता की इच्छा पूर्ण करने के लिए साधु जीवन ले लिया । इतिहास में वह अमर हो गया  । सरोवर की शोभा जल से है और हमारे जीवन की शोभा ज्ञान से है । ज्ञानी व्यक्ति हर जगह पूजा जाता है । जीवन में ज्ञान मुक्ति तक ले जाने का राज मार्ग है । ज्ञान प्राप्ति के लिए बहुत ही तपस्या करना पडती है। ज्ञान को प्राप्त कर अच्छे बुरे का पता चल जाता है ।    

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