जन्म उन्ही का सफल माना जाता है, जो संसार को एक नई दिशा प्रदान करते है : मुनि श्री समता सागर जी महाराज

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अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) – जन्म उन्ही का सफल माना जाता है, जो अपने जन्म का सही उपयोग करते है,और जिन शासन की प्रभावना में अपना योग दान देते है, उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम परिसर में श्री भक्तामरस्तोत्र के शिविर के दौरान व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि जो लोग समय पर और समय से कार्य को करते है, उनके कार्य १००% सफल होते है, एक अच्छा संयोजक वही माना जाता है, जो समय पर स्वं आऐ और समयानुसार अपने कार्य को प्रारंभ करे, और एक अच्छा विधार्थी और अच्छा श्रोता भी वही माना जाता है, जो समय पर कक्षा में आऐ और अपने विषय को पूर्ण रूप से ग्रहण करे। 

हालांकि  समवसरण में भगवान की वाणी खिरने के पहले तीनों लोक में भी दुन्दुभी वजाकर सूचना  दी जाती थी कि, भगवान की वाणी खिरने का समय हो चुका है, और यह व्यवस्था लोगों को सावधान करने के लिये होती थी हालांकि वर्तमान समय यह व्यवस्था कार्यक्रम के शुभारंभ में आयोजक लोग करते है। मुनि श्री ने कहा कि कल चतुर्दशी का दिन है, और यह पर्व का विशेष दिन है, मंगलाचरण के उपरांत आपको विशेष प्रतिक्रमण कराया जाऐगा इसलिये समय का विशेष ध्यान रखेंगे एवं साथ में डिरेस का भी सभी लोग ध्यान रखेंगे।

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मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों में धार्मिक डिरेस ही होंना चाहिये परिधान का भी हमारे जीवन में विशेष फर्क पड़ता है, उन्होंने धर्म के क्षेत्र में दिये गये दान की महिमा वताते हुये कहा कि जीवन की सुरक्षा जीवन वीमा की पालिसी लेंने में नहीं वल्कि जीवन को महान वनाने में है, जीवन वीमा आपके जीवन के वाद में आपके परिवार को सुरक्षा प्रदान करते है, लेकिन हमारे जिनालय एक ऐसी पांलिसी तैयार करते है, जो आपके वर्तमान को अधर्म से तो सुरक्षित करते ही है,साथ ही जीवन के वाद भी आपका भविष्य सुरक्षित रखते है, उन्होंने दान पूजा, अभिषेक और शांतिधारा के महत्व को समझाते हुये कहा कि वर्तमान में आप लोग जो पुण्य अर्जित कर रहे है यह आपके जीवन के इंश्योरेंस से कम नहीं है।

उन्होंने कहा कि परसों शनिवार को पूर्णिमा है, वर्ष की १२ पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा का अलग ही महत्व है, शरद पूर्णिमा की चांदनी में जो शीतलता मिलती है, वह किसी पूर्णिमा में नजर नहीं आती। फिर इस पूर्णिमा का तो अलग ही महत्व है, इस दिन एक भव्य आत्मा ने सदलगा कर्नाटक प्रांत में जन्म लिया था जो आज वर्तमान में चतुर्विद संघ के नायक के रूप में है, उन्होंने संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि जन्म तो सभी के होते है, लेकिन जन्म उन्ही का सफल माना जाता है, जो संसार को एक नई दिशा प्रदान करते है, आचार्य गुरुदेव के साथ आप सभी की जो भावनाऐं जुड़ी हुई है, उन भावनाओं को विवेक और सावधानी के साथ आपको यह विशेष दिन विशेष पर्व के रूप में मनाना है।

आप लोग घर से दीप सजाकर लाना चाहते है, लाईये और विवेक के साथ आप लोग अपने घर से लाऐ हुये दीपक को प्रज्वलित करना है। मुनि श्री ने कहा सामुहिक रुप से किये गये कार्यों का अलग ही महत्व होता है, सामुहिक रुप से समय पर की गई संयोजनाओं का लाभ भी सभी समाज को समय पर मिलता है। उन्होंने कहा कि जैसे हमारी पांच उंगलियाँ होती है, और उन पांचों उंगलियों का अपना अपना महत्व होता है। सवसे अधिक काम आपकी वही छोटी उंगली काम में आती है, जव आप संकट में होते हो इसलिये कभी किसी को छोटा या महत्वहीन नहीं समझना चाहिए। एक छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी वड़ी से वडी़ संयोजनाओं को सफल कर देती है। 

उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया शनिवार को शरद पूर्णिमा है, आचार्य गुरूदेव श्री विद्यासागरजी महाराज का जन्म दिवस है। उपरोक्त दिवस शीतलधाम में प्रातःकाल ६:३० से अभिषेक शांतिधारा के साथ नित्य नियम पूजन के साथ आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन किया गया है। आपका जन्म क्वार सुदी पूर्णीमा को हुआ था परम पूज्य गुरुदेव का ७५ वाँ जन्म दिवस शीतलधाम के इस प्रांगण में मुनिश्री समतासागर जी महाराज एवं ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज के सानिध्य में मनाया जाऐगा।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा, मध्यप्रदेश
सम्पर्क – 7828782835 / 8989696947

श्री १००८ शीतलनाथ भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणको से सुशोभित भूमि भद्दलपुर, विदिशा (म.प्र.) स्थित निर्माणाधीन समोशरण मंदिर

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