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जंहा जंहा भगवान के चरण पड़ते है वंहा वंहा स्वर्ण कमलों की रचना देवों के द्वारा होती है : मुनि श्री समता सागर जी महाराज

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) – जंहा जंहा भगवान के चरण पड़ते है वंहा वंहा स्वर्ण कमलों की रचना देवों के द्वारा होती है ,ऐसे 225 स्वर्ण कमलों की रचना स्वमेव होती है, सौधर्म इन्द्र को जानकारी रहती है, कि भगवान का श्री विहार होंना है, एवं जंहा पर धर्मोपदेश होंना होता है, वंहा पर स्वमेव समवसरण की रचना हो जाती है। उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम पर लाईव प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं से कही

उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया मुनि श्री के लाईव प्रवचन और भगवान आदिनाथ स्वामी की शांतिधारा पूरे भारत में जिनवाणी चैनल एवं यू टियूव के माध्यम से पहुंच रही है, जिसका आनंद और धर्म लाभ संपूर्ण भारत से धर्म श्रद्धालुओं के द्वारा लिया जा रहा है। 

आज सागर, नन्ही देवरी से भक्तगण विदिशा शीतलधाम पर भी पधारे एवं प्रश्नोत्तरी के माध्यम से विभिन्न राज्यों के भक्तगण भी इसका लाभ उठाकर अपने जवाब प्रेषित कर मुनिसंघ का लाईव आशीरवाद प्राप्त कर रहे है,

कल के दौनों प्रश्नों के सही उत्तर इस प्रकार है आचार्य श्री कुंदकुंद स्वामी के पांच नाम थे पदमनंदी, वक्रग्रीव ,गृद्धपिच्छ एवं एलाचार्य, मुनि श्री ने वताया कि वक्रग्रीव नाम उनका इसलिये पड़ा कि समवशरण में  स्वाध्याय करते करते उनकी गर्दन अकडकर टेडी हो गई थी इस कारण उनका नाम वक्रग्रीव पड़ा इसी क्रम में प्रश्न2 का जबाव देते हुये उन्होंने कहा कि कर्नाटकराजघराने से ताल्लुक रखने वाली “अतिमब्बे” नाम की महिला थी जो कि दान के क्षेत्र मे प्रसिद्ध हुई और उन्है दान चिंतामणि की उपाधि से विभूषित किया गया,

इसी क्रम में आज के दो नये प्रश्न इस प्रकारहै। (१) मुनिराज ज्ञानसागर जी महाराज के लिये किसे दीक्षा दैनें पर आचार्य पद प्रदान किया गया था (२) दिल्ली के साहित्यकार जो कि गांधी विचार धारा के थे श्री यशपाल जैन वह किस सन् में और किस स्थान पर आचार्य गुरूदेव श्री विद्यासागरजी महाराज के दर्शन करने प्रथमवार पधारे थे।अपना उत्तर रात्री 8 वजे तक मो. नं 9425684433 पर भेजने की कृपा करें।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

श्री १००८ शीतलनाथ भगवान के ४ कल्याणक से सुशोभित भूमि भद्दलपुर(विदिशा) स्थित निर्माणधीन समोशरण मंदिर

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