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जंगल वाले बाबा 108 मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज की जुगल में समाधि, बंगाईगांव जैन समाज ने दी श्रद्धांजलि :- अहिंसा क्रांति

अहिंसा क्रांति/रोहित छाबड़ा

जंगल वाले बाबा 108 मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज की जुगल में समाधि, बंगाईगांव जैन समाज ने दी श्रद्धांजलि:- अहिंसा क्रांति

बंगाईगांव -दिगम्बर जैन समाज के प्रवक्ता व सहसचिव रोहित कुमार छाबड़ा ने जानकारी दी कि आचार्य विद्या सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री चिन्मय सागर महाराज, जिन्हें जंगल वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता हैं।जिन्होंने 12 अक्टूबर, शनिवार को यम सल्लेखना जुगुल ग्राम जिला बेलगांव कर्नाटक में धारण कर ली थी।

उनकी गये कल शुक्रवार शाम 6: 35 बजे जुगल में समाधि हो गई, समाधि की खबर मिलते ही दर्शनों के लिए जैन श्रावक श्रावकिआओ का हुजूम उमड़ पडा लोग, पूरे देश की जैन समाज मे जैसे ही मुनिश्री की समाधि की खबर पहुची तो सभी की आँखे नम हो गयी। इसी कड़ी में जैसे ही यह खबर बंगाईगांव पहुची वहां आर्यिकारत्न 105 गरिमामती-गम्भीरमति- रतनमती व दिगम्बर जैन समाज ने उन्हे भावुपुर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की व नो बार णमोकार मंत्र का जप किया।

दिगम्बर जैन समाज के संरक्षक रतनलाल रारा, अशोक पहाड़िया अध्यक्ष विजय रारा, उपाध्यक्ष मनोज रारा, सुनील बगड़ा मंत्री कमल पहाड़िया, कोषाध्यक्ष किशोर अजमेरा, सलाहकार राजेश रावका, पन्नालाल बगड़ा, सहकोषाध्यक्ष विनोद पाटनी, सहमंत्री मीनेष पहाड़िया, कार्यकारणी के संजय बज, दिलीप छाबड़ा, दिलीप गंगवाल, प्रमोद सेठी, राजेश पहाड़िया, अशोक सेठी, वयोवृद्ध महावीर सोगानी आदि सभी दिगम्बर जैन समाज बंगाईगांव व अहिंसा क्रांति समाचार पत्र परिवार की ओर से मुनिश्री को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की व विनोद पाटनी ने कुछ पंक्तियों के माध्यम से कहा कि

परम तपस्वी गुरुदेव १०८ चिन्मय सागर जी
महाराज की उत्कृष्ठ समाधि पर स्वरांजली,
पंचम काल मे चतुर्थ काल की मुनि चया के धारी
ऐसे मुनिवर चिन्मयसागर जंगल जंगल विहारी
चौमासे मे जंगल साधना बरसो से थी जारी
निर्जन वन मे ध्यान लगाकर तप करते भारी
जंगलो मे रहने वाले आदिवासी लोग मांसाहार
और शराब का करते नित उपभोग, प्रवचन
देकर उन लोगो को अहिंसा का पाठ पढाया,
लाखो लोगो को माला देकर मांसाहार छुडाया,
साधना को देख जिनकी मृत्यु ने भी खौफ खाई,
पल्स भले ही छीनली पर अचेतन न कर पाई, चेतन्य
अवस्था मे रहकर जो पहुंचे शिवधाम है, ऐसे विरले
तपस्वी के श्री चरणों मे कोटि कोटि प्रणाम है।

प्रवक्ता रोहित ने बताया कि मुनिश्री ने समाधि होने से पहले कहा था आप मेरी अंतिम यात्रा देख रहे हो, लेकिन में संसार की अंतिम यात्रा देख रहा हूँ।

प्रवक्ता ने बताया कि मुनि श्री का स्वास्थ्य पिछले कई महीनों से ठीक नहीं था और वह कई दिनों से आहार के नाम पर जल ही ग्रहण कर रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए जैन मुनि की चर्या के अनुसार आचार्य श्री जिन सेन जी महाराज अपने संघ के साथ शेडवाल आश्रम में पहुंच गए थे, जहां पर वह मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज की मुनि चर्या में वो मदद कर रहे थे, चिन्मय सागर जी महाराज के लाखों भक्त उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों एवं दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैं उनके स्वास्थ्य का समाचार सुनने के बाद सारे देश में उनके हजारों भक्त रोजाना णमोकार मंत्र की जाप तथा जंगल वाले बाबा नमो नमः की जाप करते रहते थे। कर्नाटक में समाचार पत्रों में कन्नड़ भाषा में रोजाना चिन्मय सागर जी महाराज के स्वास्थ्य के बारे में समाचार छप रहते थे।

इस खबर को सुनकर हजारों भक्त वहा उनके दर्शन करने पहुंच गये हैं आचार्य श्री जिन सेन जी महाराज के सानिध्य में मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज जंगल वाले बाबा की समाधि चर्या होई। प्रवक्ता ने बताया गंभीर बीमारी होने के बाद भी मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज पूर्णता चेतन अवस्था में हंसते हुए अपने भक्तों का प्रणाम स्वीकार करते रहते एवं आशीर्वाद दे रहते थे जिसको देखकर उनके भक्त भी अभिभूत होते।
इससे पहले मुनि श्री ने समाज को संबोधित किया और बताया था कि मुझे तन और मन की चिंता नही है, चिंता है तो बस अपनी चेतन आत्मा और अपने परिणामों को संभालने की।

प्रवक्ता ने बताया मुनि श्री ने जीवन पर्यंत के लिए चारों प्रकार के आहार का त्याग करके सल्लेखना धारण करली थी एवं जगत के सभी जीवो से क्षमा याचना करते हुए सभी को क्षमा भाव प्रेषित किए थे ओर कल शुक्रवार देवगति को प्राप्त किया।

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