गुरु व शिष्य जब एक दूसरे को परख लेते है, तो दौनों का ही जीवन धन्य हो जाता है : मुनि श्री समता सागर जी महाराज

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विदिशा(भद्दलपुर) – हीरा भले ही कुछ वोलता नही है ,लेकिन जौहरी की आंख उस हीरे को परख लेती है, जैसे दुकान दार ग्राहक को परखता है, तो ग्राहक भी दुकानदार को परखता है, दौनों के अंदर जब विश्वास दमकता है, तो सौदा पट जाता है, ठीक उसी प्रकार गुरू और शिष्य के वीच सम्वंध होता है,यदि एक गुरु शिष्य को परखता है, तो शिष्य भी गुरु को परखता है, दौनों जब एक दूसरे को परख लेते है, तो दौनों का ही जीवन धन्य धन्य हो जाता है, गुरू को शिष्य मिल जाता है, और शिष्य को गुरु मिल जाते है, उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम में चल रहे १६ दिवसीय श्री भक्तामरस्तोत्र महिमा आराधना शिविर के अन्तर्गत व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि आचार्य मानतुंगाचार्य भगवान की भक्ती करते हुये कह रहे है, कि हे भगवन् आपके सामने तो उन रत्न जड़ित हीरा मोतीओं की भी कोई कींमत नहीं, और न ही कोई तंत्र मंत्र कींमत हुआ करती है, उन्होंने कहा कि तंत्र और मंत्र अच्छे भी होते हैं और वुरे भी होते है, णमोकार महामंत्र स्वमेव सिद्ध है, उसके सामने अच्छे अच्छे मंत्र भी फैल है। उन्होंने कहा कि सिद्धियां प्रयोजन पूर्वक सिद्ध की जाती है, जबकि रिद्धीयां कर्म क्षय करने के लक्ष्य से स्वमेव आ जाती है, उन्होंने विष्णुकुमार महामुनिराज का उदाहरण देते हुये कहा कि विक्रिया ऋद्धिधारी मुनिराज को मालुम ही नहीं था कि उनके अंदर कोई विक्रिया रिद्धी है, जिसके आधार पर वह शरीर को छोटा और वढ़ा कर सकते है, वह तो जब उनको वताया गया और उन्होंने प्रयोग किया तब उनको विश्वास हुआ। कि रिद्धीयां उनके पास है,

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उन्होंने तंत्र मंत्र की चर्चा करते हुये कहा कि जब तक तुम्हारा विश्वास णमोकार महामंत्र पर  है, तव तक दुनिया की कोई भी तंत्र मंत्र आपके ऊपर प्रभाव नहीं डाल सकता उन्होंने सभी चारणरिद्धीधारी सभी मुनिराजों को अर्घ समर्पित करते हुये कहा कि आप लोगों को शीतलधाम पर कैसा लग रहा है? सुनकर उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियां वजा दी। आचार्य मानतुंगाचार्य कहते है कि जब कोई ग्राहक पूरा वाजार घूम घाम कर किसी दुकान पर पहुंचता है, तो लगभग उसका सौदा पट ही जाता है, तो हे प्रभु में भी संसार के समस्त देवी देवताओं की शरण में जाकर आपकी शरण में आया हूं, जब आपकी भक्ती में ही में आनंदित हो रहा हूं तो भगवान के साक्षात समवसरण में कितना आनंद आऐगा उसे कहा नहीं जा सकता। 

प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया प्रातःकालीन वेला में ६ ३०वजे से शीतलधाम पर अतिशयों से युक्त भगवान श्री आदिनाथ स्वामी वर्रो वाले वावा की शांतिमंत्रों के साथ मुनि श्री के मुखार विंद से शांतिधारा संपन्नहुई।तत्पश्चात भक्तामर स्त्रोत शविर में मुनि श्री का सम्वोधन उपरांत श्री उत्तमचंद जी जैन जैसीनगर वाले जो कि ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के पिता थे श्री सकल दि. जैन समाज, श्री शीतल विहार न्यास टृस्ट द्वारा विनयांजलि सभा का आयोजन शीतलधाम पर किया गया जिसमें विदिशा जैन समाज के अलावा खुरई, सागर एवं जेसीनगर से परिवारीजन एवं निकटतम सभी रिस्तेदार भी पधारे।

मुनि श्री ने सम्वोधित करते हुये सभी को आशीर्वाद दिया।समाज की ओर से विनयांजलि अर्पित की गई। ज्ञातव्य रहे 25 अक्टूवर रविवार को जेसीनगर निवासी श्री उत्तमचंद जी की 84 वर्ष की आयु में समाधी सल्लेखना के साथ हो गयी थी। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद से 45 दिन पूर्व मुनि श्री समतासागर जी से सात प्रतिमा  के साथ नियम संल्लेखना वृत को धारण किये थे वह पिछले १५ दिन से मात्र जल पर चल रहे थे। एवं विजया दशमी को उन्होंने दौपहर मे अंतिम सांस ली थी।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा, मध्यप्रदेश
सम्पर्क – 7828782835 / 8989696947

श्री १००८ शीतलनाथ भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणको से सुशोभित भूमि भद्दलपुर, विदिशा (म.प्र.) स्थित निर्माणाधीन समोशरण मंदिर

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