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गुरुदेव प्रमोद एवं करूणा के संगम थे : राजमती म सा

अहिंसा क्रांति अखबार


                   
जोधपुर । महावीर भवन  निमाज की हवेली में चातुर्मास हेतु विराजमान महाश्रमणी पुष्पवती म. सा आदि ठाणा  सात के पावन सानिध्य में गुरु – मिश्री – रूप  जयंती पर गुणानुवाद सभा का आयोजन हुआ । इस अवसर पर उपप्रवर्तिनी राजमती म.सा.  ने कहा कि गुरुदेव मिश्रीमल म.सा. का ज्ञान, मान, सम्मान गंगा जल के समान शीतल, शुद्ध और निर्विकार  था । वे मैत्री, प्रमोद और करुणा के संगम थे ।  गुरुदेव ने जैन समाज को ही नहीं अपितु  मानव समाज के हित के लिए भी अनेक शिक्षण संस्थाओ, चिकित्सालयो के  संप्रेरक  रहे ।

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शांति के अमर दूत, हिम्मत के बादशाह और समता भाव के साधक को  भाव वंदन  के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।            साध्वी डॉ. राज रश्मि ने कहा कि द्वय गुरु भगवंत, गुरु मिश्री – रूप रजत की जोधपुरवासियों पर अपार कृपा रही है । उन्होंने संगठन का उपदेश दिया । गुरु एक सेवा अनेक  का उपदेश देकर राग -द्वेष  की जगह समता का पाठ पढ़ाया । ऐसे गुरु  के  भक्तों को सदैव  संघ समाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रहना चाहिए । यही उन महान विभूतियों के प्रति सच्ची  श्रद्धांजलि होगी ।     

     साध्वी डॉ.राज ऋद्धि  ने कहा कि द्वय गुरु भगवंत का जीवन  वंदनीय और अर्चनीय रहा । वे दया के देवता कर्म, भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी थे ।         साध्वी राज लक्षि, राज वृद्धि, और राज कीर्ति  ने भी संगीत के माध्यम से अपने उदगार व्यक्त किये । जैन कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ मार्गदर्शक नेमीचंद चौपड़ा ने द्वय महापुरुषों के प्रति अपनी भावांजलि अर्पित की ।  इस अवसर पर  लाभचंद  टांटिया, मरुधर केसरी युवक मंडल, महिला मण्डल की  श्रीमती पूजा सुराणा, शिल्पा  संकलेचा, सुशीला कोठारी, सुश्री तनुश्री, हिमांशु  इत्यादि वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये। सभा का संचालन संघ महामंत्री सुनील चोपड़ा एवं सम्पत गुगलिया ने किया । राकेश कोचर ने बताया कि गुरूद्वय जन्म जयंती के उपलक्ष्य में विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक एवं श्राविकाओं ने भी भाग लिया । 

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