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गुरुदेव ने विभिन्न मंत्रो एवं अगम के श्लोक के माध्यम से जप करवाया।

तेरापंथ धर्म संघ के एकादशम अधिशास्ता महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना केंद्र के महाश्रमण समवसरण में नवरात्रि के उपलक्ष में आज नवनव्हिक आध्यातमिक अनुष्ठान का शुभारंभ हुवा,
आचार्य श्री महाश्रमणजी ने मंगल पाथेय प्रदान करते हुए फरमाया कि जैन वाड्मय में छह प्रकार के जीवों का उल्लेख मिलता है| पृथ्वी, पानी, वायु,  अग्नि, वनस्पति व त्रसकाय | इन सबमें जीव आत्माएं, अर्थात जीवत्व विध- मान हैं बनस्पति और आदमी में तो समनता की दृष्टि से तुलना की गई है | पेड़ को काटने को पुत्र के मारने जैसा माना गया है |

आज अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत पर्यावरण दिवस है | हम अनपेक्षित हिंसा, प्रकृति के दोहन व परिग्रह से बचें व पर्यावरण की दृष्टि से विचार करें कि कहीं पानी का अनावश्यक दुरूपयोग तो नहीं हो रहा| यदि कम पानी या जरूरत भर के पानी से हाथ धो लिए जांय तो व्यर्थ अधिक पानी दुरूपयोग क्यों किया जाय | स्नान करने में भी आवश्कतानुसार ही पानी का उपयोग हो, ऐसा नहीं की व्यर्थ नल से पानी बह रहा है | इसी तरह बिजली का भी अनावश्यक उपयोग न करें | माइक में भी उतनी ही ध्वनि हो जितनी सुनने के लिए जरूरी हो| ध्वनि का भी प्रदुषण होता है | हम दिन भर के अपने कार्यों का विवेचन करें व आवश्यक कार्यों को सूचिबद्ध कर लें |

हम पदार्थों का अनावश्यक उप- योग न करें तो यह पर्यावरण शुद्धि में उपयोगी बन सकता है ।
अणुव्रत उध्बोधन सप्ताह के चतुर्थ दिवस पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में पानी का उपयोग जितना हो सके उतना कम करें जिससे जीवो की रक्षा हो सके अनावश्यक पानी को व्यर्थ ना करें। सबको आवश्यक एवं अनावश्यक काम की सूची बनानी चाहिए और जितना हो सके अनावश्यक काम से बचना चाहिए ध्वनि का उपयोग भी जितनी आवश्यकता है उतनी ही की जाए जिससे ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण पा सके इन सब बातों पर अगर हम ध्यान देते हैं तो इससे पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं। धुंवा, ध्वनि, पंखा बिजली, पानी एवं पृथ्वी इन चीजों में संयम का ध्यान दे इससे पर्यावरण की शुद्धि हो सकती है एवं अहिंसा संयम का भी ध्यान रखा जा सकता हे।


साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी ने मंगल उद्धबोधन प्रदान करते हुए फरमाया की आध्यामिक अनुष्ठान का शुभारंभ शक्ति जागरण का समय हे, सब लोग चाहते के आध्यात्मिक के क्षेत्र में आगे बढ़े सोई हुई शक्तियों को जगाए अपने जीवन को सार्थक एवं सफल बनाएं जीवन को सार्थक एवं सफल बनाने के लिए आध्यात्मिक जीवन अनिवार्य है। आध्यात्मिक शक्ति का जागरण आत्मा की ज्योति का जागरण है जब तक आत्मा ज्योतिर्मय नहीं बनती है आध्यात्मिक जागरण नहीं होता है आत्मा के पास सबसे बड़ी जो शक्ति है वह आध्यात्मिक की है। महाराजा जनक एवं महाऋषि कथानक के माध्यम से उपस्थित जनवेदनी को आत्मज्योति को कैसे जगाये । आत्मा की ज्योति से आदमी सब कुछ जान सकता है,सबसे बड़ा उपाय यह है जो आदमी अपने प्रति सजग रहता है वह आत्मज्योति को जागरूक कर सकता हे। सुख और शांति की कामना है मनुष्य को तो मनुष्य को अपना क्षण क्षण का उपयोग करना चाहिए आयुष्य का एक एक क्षण जो बीत जाता है जाता है तो वह लौट के वापस नहीं आता है।


आचार्य श्री महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति की महामंत्री ने सूचना के क्रम में 6 अक्टूबर अगले रविवार को बैंगलोर में प्रवासित 70 वर्ष की आयु से ऊपर वाले सभी श्रावक श्राविको का समलेन आयोजित किया गया है। संचालन मुनि श्री दिनेश कुमारजी ने किया।

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