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केवल्यज्ञान की अवस्था में सारे उपसर्ग और भूख प्यास आदि १८ दोषो की समाप्ती हो जाया करती है -मुनि श्री


अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर)-आज का विज्ञान सव कुछ कर सकता है, मौटा आदमी को दुवला वना सकता है, और दुवले आदमी को मौटा वना सकता है, मानवकृत चमत्तकार की कई घटनाऐं घट जाया करती है, लेकिन जन्म मरण के जो १८ दोष है, उन सभी दोषों को नष्ट कर  चार घातिया कर्म पर विजय प्राप्त करने का चमत्कार तो सिर्फ अरिहंत परमेष्टी ने ही किया है।

“दुनिया में परिवर्तन कर दैने का काम विज्ञान ने किया है, लेकिन अपनी आत्मा में परिवर्तन कर अपने आपको जीत लैने का काम सिर्फ जैन धर्म ने ही संभव कर दिखाया है, उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम में ओन लाईन धर्मसभा में व्यक्त किये

उन्होंने ओन लाईन धर्मसभा को सम्वोधित करते हुये कहा कि शरीर है, तो भोजन की जरूरत तो पड़ेगी ही पड़ेगी, आधुनिक विज्ञान ने वहूत से चमत्कार तो किये लेकिन ऐसा कोई चमत्कार नहीं कर सका कि यह जीव क्षुदा रोग से सदैव के लिये तृप्त हो सके, लेकिन वीतराग विज्ञान ने इसे सिद्ध कर दिया और भगवान की वाणी में आया है कि केवल्यज्ञान की अवस्था में सारे उपसर्ग और भूख प्यास आदि १८ दोषो की समाप्ती हो जाया करती है। हालांकि स्वेतांमवर परंपरा में केवल्यज्ञान के पश्चात भी आहार को निकलने की परंपरा का उल्लेख मिलता है।

मुनि श्री ने स्व. पंडित सागरमल जी को याद करते हुये कहा कि उन्होंने धर्म प्रभावना और मुनिओं के सम्मान में हमेशा आगे वड़कर कार्य किया है।एवं एकांत पक्ष को समाप्त करने में अपना योगदान दिया। उन्होंने उनके प्रोफेसर पुत्र डा. पंकज जैन  सीहोर एवं विवेक जैन को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

संचालन करते हुये श्री शीतलविहार न्यास शीतलधाम  के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया कि भगवान श्री आदिनाथ स्वामी और शीतलधाम परिसर का ही यह अतिशय है, कि यंहा पर आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद से इस कोरोना काल में वातसल्य मूर्ती मुनि श्री समतासागर जी महाराज एवं ऐलक श्री निश्चय सागर जी महाराज के सानिध्य में विशेष कार्यक्रम संपन्न हो रहे है।

प्रातःकाल ६:३० वजे से अभिषेक  एवं विशेष शांतिमंत्रों के साथ मुनिसंघ के मुखारविंद से विश्व में कोरोना रोग से शांति को लेकर तथा आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का स्वास्थ्य एवं समस्त मुनिसंघ आर्यिका संघ स्वस्थ रहें इस मंगल भावना से शांतिधारा संपन्न हो रही है। ओन लाईन प्रवचन सभा८:१५ से९ वजे तक १० वजे से आहारचर्या दौपहर ३:३० से४:३० तक “चैतन्य चंद्रोदय शतक”( संस्कृत) का सभी ब्रह्मचारी भाइओं के एवं सभा में उपस्थित स्वाध्यायी श्रावकों के साथ किया जा रहा है।

सांयकाल६:१५ से गुरुभक्ती ६:४५ से जाप अनुष्ठान ७ वजे से आरती एवं  प्रश्नमंच का कार्यक्रम प्रतिदिन संपन्न हो रहा हैं। जिसका लाभ स्थानीय श्रद्धालु तो उठा ही रहे है, साथ ही साथ ओन लाईन यू टियूव और जिनवाणी चैनल के माध्यम से संपूर्ण भारत के श्रावक भी घर वैठकर उठा रहे है,

प्रतिदिन ओन लाईन दो धार्मिक प्रश्न मुनि श्री द्वारा पूंछे जाते है, जिनका जवाव खोजवीन कर भारत के विभिन्न नगरों से श्रोता शोसल मीडिया के माध्यम से भेजते है।सही उत्तर दैनै वालों का नाम मुनि श्री के द्वारा आशीर्वाद के साथ लिया जाता है।जिनवाणी चैनल के माध्यम से शांतिधारा १० वजे एवं सांयकाल ५:२० पर “सागर वूंद संवाए” विशेष प्रवचन माला का प्रसारण किया जा रहा है।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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