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कुटिलता और मायाचारी का परित्याग ही उत्तम आर्जव धर्म – मुनि विभंजन सागर

अहिंसा क्रांति / अतुल जैन


जयपुर। दिगम्बर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर में चल रही दशलक्षण पर्व पूजा के दौरान गुरुवार को तीसरे दिन ” उत्तम आर्जव धर्म ” पर्व मनाया गया। साथ ही ” णमोकार विधान पूजन ” भी किया गया। मानसरोवर में पहली बार चातुर्मास कर रहे मुनि विश्वास सागर महाराज और मुनि विभंजन सागर महाराज ससंघ सानिध्य में गुरुवार को प्रात: 6 बजे से मुलनायक महावीर भगवान विशाल जिन बिम्ब प्रतिमा पर स्वर्ण एवं रजत कलशो से कलशाभिषेक किये गए। इस दौरान दो अन्य वेदियो पर विराजमान मूलनायक आदिनाथ भगवान एवं पार्श्वनाथ भगवान पर भी श्रद्धालुओं ने कलशाभिषेक किये। जिसके उपरांत प्रातः 7.15 बजे मुनि श्री के मुखारविंद भव्य एवं वृहद शांतिधारा का गुणगान करते हुए सृष्टि पर भाईचारा बढ़े और लोगो मे एक-दूसरे की संवेदना बड़े, मायाचारी का नाश की भावना भाते हुए महार्घ चढ़ाया।

अध्यक्ष एमपी जैन ने बताया कि प्रातः 7.30 बजे से मन्दिर के आचार्य विद्या सागर सभागार में मुनि श्री ससंघ सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रधुम्न शास्त्री के निर्देशन में दशलक्षण पर्व का विधानपूजन गीत-संगीत के साथ चल रहा है विधानपूजन प्रारम्भ से पूर्व पूजन के सोधर्म इंद्र पाण्डुक्षिला पर विराजमान श्रीजी के स्वर्ण कलश से प्रथम कलश करते है और अन्य इन्द्रों द्वारा अभिषेक कर, पुनः सौधर्म इंद्र द्वारा शांतिधारा कर अर्घ चढ़ाया जाता है। गुरुवार को पूजन के दौरान नित्य नियम पूजन के साथ उत्तम आर्जव धर्म एवं णमोकार विधान पूजन का विधान किया गया। जिसमे वरुण पथ जैन समाज के 150 से अधिक श्रद्धालु प्रतिदिन भाग लेकर गीत-संगीत, भजन नृत्य करते हुए जिनेन्द्र आराधना कर श्रीजी की भक्ति के रस में सरोबर होकर विधान पूजन में अष्ट द्रव्य अर्घ चढाते।

इस अवसर पर सोधर्म इंद्र बनने का सोभाग्य समिति उपाध्यक्ष अनिल लक्ष्मी जैन बांसखो वालो को प्राप्त हुआ, साथ ही धर्मसभा में दीप प्रव्ज्ज्लन करने का सोभाग्य समाज सेवी राजेश जैन जैन ज्वेलर्स को प्राप्त हुआ.पूजन विधान के दौरान मुनि विभंजन सागर महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म पर अपने उपदेश देते हुए कहा की ” मन वचन काय की कुटिलता का परित्याग करके चित्त में सरल निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म कहलाता है. आर्जव धर्म के समान संसार में कुछ भी प्रशंसनीय नही है आज प्रत्येक प्राणी मायाचार से ग्रस्त है यह माया ही प्राणियों को संसार में भटकाती है जिस प्रकार छोटी सी, चिंगारी सारे घर को जलाकर भस्म कर देती है उसी प्रकार कुछ अंशो में यदि हम चल कपट रखते है, व्रत, संयम, तप के द्वारा उपजित पुण्यकर्मो को छण भर में नष्ट कर देती है. अपने मन में जेसा विचार हो वैसा ही दूसरो से वचन से कहो, उसी प्रकार काय की चेष्टा करो, यही सुख देनेवाला निश्चय धर्म है. जो व्यक्ति मायाचारी होता है वह टेढ़ा – मेढ़ा और कुटिल होता है।” 

मुनि विश्वास सागर महाराज ने अपने उपदेश में कहा की ” हम आज तक मायाचारी से ठगते आये है, माया ठगनी न ठगी,ठगया सारा संसार. जिसने माया को ठगा उनकी जय जयकार जो उस मायाचारी की पोल खोल दे माया को ठग दे वह गुरु होता है और जो मायाचारी में फँस जाए वह भेद होता है ठगना नही हमारे जीवन में कितनी मायाचारी है. हमारी प्रत्येक क्रिया मायाचार से युक्त वह व्यक्ति कभी भी अपने जीवन में सफल नही हो सकता है क्योकि जो मायाचारी होता है उस व्यक्ति का कोई सम्मान नही करता. उत्तम आर्जव धर्म हमे यह शिक्षा देता है कि छल- कपट को छोड़ दो, अपने जीवन में सरल सहज बनो तभी तुम्हारा कल्याण संभव है।

समिति कोषाध्यक्ष कैलाश सेठी ने बताया की शुक्रवार 6 सितम्बर को मुनि श्री ससंघ सानिध्य में ” उत्तम शौच धर्म ” पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान प्रातः 6 बजे से कलशाभिषेक, शांतिधारा कर विधानपूजन का आयोजन होगा। प्रतिदिन सायं : 6.30 बजे से मूलनायक महावीर भगवान की मंगल आरती का आयोजन होता है। जिसके बाद मुनि संघ की आरती एवं आनंद यात्रा का आयोजन होता है। सायं 7.15 बजे से प्रतिष्ठाचार्य प्रधुम्न शास्त्री द्वारा दस धर्म के प्रवचन एवं उसके बाद रात्रि 8.15 बजे जैन युवा मंडल एवं महिला मंडलों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। शुक्रवार को जैन धर्म के 8 वें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत स्वामी का मोक्ष कल्याणक पर्व भी मनाया जायेगा। इस दौरान पुष्पदंत भगवान का पूजन कर अष्ट मंगल पाठ के गुणगान के साथ 8 किलो का निर्वाण लड्डू चढ़ाया जायेगा एवं मुनि विश्वास सागर एवं मुनि विभंजन सागर महाराज के ” उत्तम शौच धर्म ” पर मंगल प्रवचन होंगे।

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