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ऑनलाइन “भक्तामर महिमा आराधना शिविर” का आयोजन शनिवार से होने जा रहा

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) – जन्मदिन एक खुशी का अवसर होता है, जो लोग जन्मोत्सव  को धार्मिक क्रिआओं से जोड़कर अपने जन्मदिन को सार्थक करते है, तो उनका जन्मदिन व्यर्थ डे न वन कर एक सार्थक यादगार डे वन जाता है। उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम पर ओन लाईन धर्म सभा को सम्वोधित करते हुये कहे। उन्होंने कहा कि जब मेंने इस संद्रभ में चिंतन किया तो पाया कि अधिकांश तीर्थंकरों का दीक्षा कल्याणक और उनकी जन्म कल्याणक की तिथी को एक साथ पाया तो लगा कि जिनकी होंनहार भली होती है, वही अपने जन्म दिन को सार्थक वना पाते है, और वह अपने परिवार सहित प्रातःकालीन वेला में भगवान का अभिषेक और शांतिधारा करते है, वंही कुछ परिवार उपरोक्त दिन धार्मिक अनुष्ठान विधान आदि कर, गौ शालाओं में जाकर जीवदया के कार्य को करते है।

चातुर्मास कमेटी के मीडिया प्रभारी एवं शीतलधाम के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया गुरुवर आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद से मुनि श्री समतासागर जी महाराज एवं ऐलक श्री निश्चय सागर जी महाराज के संघ सानिध्य में आचार्य मानतुंगाचार्य द्वारा रचित “भक्तामर महिमा आराधना शिविर” का १६ दिवसीय आयोजन किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ दिनांक १७ अक्टूवर शनिवार को प्रातः८ वजे होगा, शिविर में सीमित संख्या में युवाओं को आमंत्रित किया गया है, जिससे उनके अंदर धार्मिक संस्कारों का वीजारोपड़ हो सके। १८ अक्टूवर से प्रातः ८ वजे से९ वजे तक भक्तामर की महिमा के संद्रभ में मुनि श्री के द्वारा भक्तामर के ४८ स्लोकों का अर्थ सहित व्याख्या होगी जो कि लगातार १६ दिन तक चलेगा। 

चतुर्दशी के पावन प्रसंग पर आज  पंचपरमेष्ठी विधान का संगीतमय आयोजन ब्र.अनूप भैयाजी के निर्देशन में पुण्यार्जक परिवार श्री राहुल ज्ञानचंद जैन करैया खेड़ा परिवार के साथ संपन्न हुआ। ओन लाईन प्रश्नोतरी के कार्यक्रम के तहत मुनि श्री ने दो नये प्रश्नों के उत्तर खोजने हेतु दिये? (१) आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की दीक्षा के उपरांत संघ सहित सर्वाधिक चातुर्मास किस जिले में हुये? (२) नन्ही देवरी ग्राम में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज किस किस सन् में कितनी उनका पदार्पण हुआ? आपको तिथीभी निकाल कर वताना है? इसके साथ ही मुनि श्री ने १४ अक्टूबर के प्रश्नों का उत्तर देते हुये वताया  ब्र. साधना दीदी की दीक्षा रंगीन साड़ी पहने हुये सवसे पहले हुई थी, उनका अतिशयमति माताजी रखा गया था एवं उनकी संल्लेखना समाधि हो चुकी है। दूसरे प्रश्न का उत्तर देते हुये कहा कि मुनि श्री अभय सागर जी ने आचार्य श्री से सन्१९८२ नैनागिर में ब्रह्मचर्यव़त कैश लोंच के साथ ही लिया था ।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा, मध्यप्रदेश
सम्पर्क – 7828782835 / 8989696947

श्री १००८ शीतलनाथ भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणको से सुशोभित भूमि भद्दलपुर, विदिशा (म.प्र.) स्थित निर्माणाधीन समोशरण मंदिर

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