आत्मीय दोषों से मुक्त होंने के लिये ही प्रतिक्रमण प्रतिदिन करना चाहिये : मुनि श्री समता सागर जी महाराज

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शरदपूर्णिमा के अवसर पर आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज का ७५ वां जन्म महोत्सव मनाया जाएगा

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) – लोभ आदि के वशीभूत होकर किसी दूसरे के धन, वस्त्र मकान जमीन का अपहरण करना, अतिक्रमण करना, दूसरे की वस्तु को अपनी वताना, कम मूल्य की वस्तु अधिक मूल्य में वेंचना, चोरी किया हुआ माल खरीदना और वेंचना, राज्य के नियमों के विरूद्ध टेक्स की चोरी करना, मिलावट सम्वंधी दोष तथा रिश्वत, लैना और रिश्वतखोरी का समर्थन करना दोष माने गये है, इन सभी दोषों से आत्मा अपवित्र होती है,आत्मीय दोषों से मुक्त होंने के लिये मनसः वाचाः कर्मणाः प्रतीक्रमण किया जाता है। उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम विदिशा में भक्तामर स्त्रोत शिविर के वीच में आज सभी शिविरार्थियों को प्रतिक्रमण कराया।

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मुनि श्री ने कहा कि विना देखे चलने फिरने मे, दौड़ने में, वस्तु उठाने धरने रखने में, मल मूत्र कफ आदि के विसर्जन में विश्राम करने में घर में साफ सफाई, झाड़ू पौंछा लगाने, भोजन वनाने, अग्नी जलाने, कपड़ा धोने, किसी दूसरे व्यक्ती की चुगली करना,उनको सताना यह सभी दोष वताऐ गये है ,इनसे आत्मा अपवित्र होती है, आत्मीय दोषों से मुक्त होंने के लिये ही प्रतिक्रमण प्रतिदिन करना चाहिये।और आर्तध्यान रौद्रध्यान से वचना चाहिये। खोटी संगति और संसार में घर में कलह अशांति से दूर रहकर धर्म को नष्ट करने वाले नशीले पदार्थ तम्वाकू, जर्दा, पान मसाला, अफीम, चिलम, गांजा, भांग, शराब, चरस ,सिगरेट, विड़ी, आदि धूम्रपान न तो स्वं करना चाहिये और न ही उसकी अनुमोदना करना चाहिये।

उन्होंने महिलाओं को सम्वोधित करते हुये कहा कि शरीर के श्रंगार के वशीभूत होकर प्रसाधन सामग्री का उपयोग शैम्पू, क्रीम पावडर, सुगंधित तैल, लिपस्टिक, नैल पालिस, परफ्यूम, चमड़े से वने जूते, वेल्ट वैग पर्स,आदि का उपयोग करना और उसकी अनुमोदना करने से भी आत्मा में दोष लगता है, इन सभी दोषों से आत्मा को मुक्त रखने के लिये प्रतिक्रमण किया जाता है। उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया कि शनिवार 31 अक्टूबर को शरदपूर्णिमा के अवसर पर आचार्य गुरूदेव श्री विद्यासागरजी महाराज का 75 वां जन्म महोत्सव मनाया जाऐगा।

इस अवसर पर प्रातःकाल 6:30 से भगवान का अभिषेक तत्पश्चात शांतिधारा नित्य नियम पूजन, के पश्चात आचार्य छत्तीसी विधान, 8:15 से धर्म सभा का आयोजन किया गया है। जिसमें आचार्य श्री के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला जाऐगा। श्री सकल दि. जैन समाज श्री शीतल विहार न्यास, चातुर्मास कमेटी की ओर से विदिशा नगर के धर्म प्रेमी वंधुओं को आमंत्रित किया गया है। सभी लोग शोसल डिस्टेंस के साथ कार्यक्रम में पधारें। इस अवसर पर दीप सजाओ प्रतियोगिता तथा रांगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन रखा गया है।दौपहर में 3:30 से स्वाध्याय एवं सांयकाल 6:45 से भक्तामर पाठ एवं महाआरती का आयोजन रहेगा।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा, मध्यप्रदेश
सम्पर्क – 7828782835 / 8989696947

श्री १००८ शीतलनाथ भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणको से सुशोभित भूमि भद्दलपुर, विदिशा (म.प्र.) स्थित निर्माणाधीन समोशरण मंदिर

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