आचार्यश्रीजी शिवमुनिजी के सान्निध्य में श्री उत्तराध्ययन सूत्र की वांचना 27 अक्टूबर से

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AHINSA KRANTI NEWS
बेंगलुरु। भगवान महावीर के निर्वाण कल्याणक के प्रसंग पर बालेश्वर सूरत में चातुर्मासार्थ विराजित विश्व संत, ध्यानयोगी, श्रमण संघीय आचार्यश्री डॉ शिवमुनिजी महाराज के पावन सान्निध्य में श्रमण संघीय सहमंत्री श्री शुभममुनिजी महाराज द्वारा भगवान महावीर की अंतिम वाणी श्री उत्तराध्ययन सूत्र की वांचना मूल, अर्थ एवं विवेचन विधि सहित 27 अक्टूबर से 16 नवम्बर 2020 तक आयोजित होगा।  प्रातः 8.30 से 9.30 बजे तक वांचना पश्चात शिवाचार्यश्री की अमृतवाणी प्रातः 9.30 से 10 बजे तक ऑनलाइन द्वारा सीधा प्रसारण यूट्यूब पर होगा। कुल मिलाकर प्रभु महावीर के समवसरण की भाव यात्रा के 21 दिवसीय अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण रहेगा। यह जानकारी श्रावक समिति के राष्ट्रीय प्रचार मंत्री सुनील सांखला जैन ने दी। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर की अंतिम देशना पावापुरी में फ़रमायी गई थी।  भगवान ने भारत के अनेक क्षेत्रों में विहार किया, उपदेश दिए, हजारों शिष्यों को दीक्षा दी।

केवलि पर्याय के 30, दीक्षा के 42 व जन्म के 72वें वर्ष में अंतिम चातुर्मास और जीवन का अंतिम वर्ष बिताने के लिए भगवान बिहार के अपापापुरी (पावापुरी) पधारे थे। वे वहां हस्तिपाल राजा के कर्मचारियों की रज्जूगशाला में चार माह रहे। चातुर्मास के अंतिम महीने कार्तिक की कृष्ण अमावस्या पर परिनिर्वाण, चतुर्थी और अमावस्या के दो निर्जल उपवास किए। स्वर्ण कमल पर पद्मासन में बैठकर लोक कल्याण के लिए अंतिम देशना की। सभा में देव निकाय, चतुर्विध, श्रीसंघ, आमजन और काशी कौशल आदि जनपद के 18 राजा भी मौजूद थे। भगवान ने पुण्य, पाप फल विषयक अध्ययन का वर्णन किया। अमावस्या की पिछली रात के चार प्रहर शेष रहे, तब भगवान ने 16 प्रहर (48 घंटे) की धारा प्रवाह देशना दी थी, जिसे ‘उत्तराध्ययन सूत्र’ के नाम से जाना जाता है। 72 वर्ष की आयु पूर्ण कर भगवान की आत्मा ने सदा के लिए देह का त्याग कर दिया। सुनील सांखला ने बताया कि श्री उत्तराध्ययन सूत्र परमपिता भगवान महावीर की अंतिम देशना है।

अर्थात परमपिता का दिया हुआ चरम परम मंगल वचन है। सांखला के मुताबिक ऐसा कल्याणकारी प्रकाश जिसको झेलने के लिए समस्त देव तीन दिन तक पहली बार धरती पर रहे, जो पूर्व में एक ही प्रहर तक रुकते थे। यही एक मात्र भगवान प्रभु महावीर की धर्मसभा थी, जो 16 प्रहर तक चली। सोलह प्रहर तक जो सूर्य प्रकाश प्रसारित होता गया, उसको जिस तिजोरी में सदा-सदा के लिए आरक्षित किया गया वह है श्री उत्तराध्ययन सूत्र। उन्होंने बताया कि पंचम गणधर सुधर्मा स्वामी ने हमारे लिए भगवान के वरदान को अक्षर रूप में अक्षय किया। इक्कीस हजार साल तक जो प्रश्न हमारे सामने आयेंगे, उनका उत्तर समाधान श्री उत्तराध्ययन सूत्र ही है, जो भगवान महावीर ने पहले ही बता दिया है। ऐसे जियेंगे तो जीवन में धर्म होगा। जीवन में इधर-उधर भटकने की तो ज़रूरत रहेगी ही नहीं और जीवन सफल होगा। श्रद्धा को बोधसंपन्न बनाने के लिए परमात्मा प्रभु महावीर की चरम-परम देशना के रूप में प्रसिद्ध है। सुनील सांखला ने यह भी बताया कि आने वाली पीढ़ी भगवान की परम-चरम मंगल वरदान से जुडी रहे इसलिए अपने परिवार में प्रतिदिन आराधना करनी ही चाहिए। श्री उत्तराध्ययन सूत्र तीर्थंकर महावीर स्वामी के अंतिम प्रवचनों का एक अनमोल सूत्र है, जिसमें जीवन का सर्वांगीण विवेचन है। यह साम्प्रदायिक नेता-मुक्त, असाम्प्रदायिक अभिनिवेश मुक्त बाह्यी कर्मकांड आडम्बर से मुक्त, शुद्ध जीवन धर्म की सर्वकल्याणमयी, मंगलमयी प्रेरणा का विश्वकोष है।

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