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अहिंसा के बल पर स्वतंत्र हुआ भारत बन रहा हिंसा का देश – मुनि विश्वास सागर जी

AHINSA KRANTI NEWS

सुसनेर (आगर मालवा )। महात्मा गांधी ने अहिंसा के बल पर देश को आजाद कराया लेकिन स्वतंत्र भारत मे हिंसा दिनों दिन बढ़ती जा रही है। जब देश परतन्त्र था तब देश मे बूचड़खानो की संख्या कम थी आज यह संख्या ज्यादा हो गई है। विदेशी मुद्रा हासिल करने के लिए पशुओं का मांस विदेशों में निर्यात किया जा रहा है। आने वाले समय मे पशुओं के आयात के लिए फिर धन खर्च करना पड़ेगा। अहिंसा के बल पर स्वतंत्र हुआ भारत हिंसा का का देश बनता जा रहा है। उक्त विचार स्वतंत्रता दिवस के विशेष व्यक्तव्य पर श्रमण मुनि श्री विश्वास सागर जी ने व्यक्त किये। 

उन्होंने बताया कि जहा गाय को माता माना जाता है वैदिक दर्शन के अनुसार गाय की पूंछ में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास बताया गया है। उसको राष्ट्रीय पशु घोषित कराने के लिए साधुओं को आंदोलन करना पड़ रहे है। क्या यही स्वतंत्रता की निशानी है। भारत स्वतंत्र तो नही हुआ पर स्वच्छंद जरूर हो गया है। मुनि श्री ने नागरिकों को कर्तव्य बोध कराते हुए कहा कि देश का नागरिक अपने अधिकारों की बात तो करता है लेकिन अपना कर्तव्य निभाना नही चाहता है। इसी कारण से हमारा देश पिछडा हुआ है।

सरकार शिक्षा पर करोड़ो रुपया खर्च कर शिक्षित बनाती है और जब सेवा का मौका आता है तब देश का नागरिक अधिक धन कमाने के लालच में अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटकर विदेशों में सेवा देने चला जाता है। यदि सभी नागरिक भारत मे सेवा देने का संकल्प कर ले तो भारत जल्द ही विकसित देशों में अग्रणी हो जाएगा। मुनि श्री ने स्वतंत्रता के तीन प्रकार राष्ट्रीय स्वतन्त्रता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता व आत्म स्वतंत्रता बताते हुए कहा कि राष्ट्र स्वतंत्र हो गया है। लेकिन व्यक्ति विचारों से ओर आत्मा कर्मो से स्वतंत्र नही हो पायी है। यदि व्यक्ति महावीर के पांच सिद्धान्तों को अपना ले तो वह तीनो प्रकार से स्वतंत्र हो सकता है। ओर सम्पूर्ण विश्व में अमन चैन शांति कायम हो सकती है।

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