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अष्टानिका पर्व के समापन एवम गुरूपूर्णिमा पर निकली रथ यात्रा

AHINSA KRANTI / सन्मति जैन काका

सनावद | आषाढ़ माह में अष्टानिका पर्व के समापन व गुरु पूर्णिमा पर शहर के श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ रथ यात्रा निकाली गई। सन्मति जैन काका ने बताया गुरुपूर्णिमा व अष्टानिका पर्व के समापन पर मंगलवार को सुबह से नित्य नियम अभिषेक, पूजन किया गया। इसके बाद आचार्य 108 वर्धमान सागर महाराज का गुरु पूजन सभी भक्तों व समाजजनों द्वारा किया गया। मंदिर जिनमे विराजमान आर्यिका 105 विदक्षा मति माता जी ने दोपहर में श्री 1008 सिद्धचक्र मंडल विधान के पूजन का समापन 1024 अर्घ चढावा कर किया गया। एवम माता जी ने मंडल विधान की महिमा बताते होवे कहा की सिद्धचक्र विधान का महत्व बताते हुए कहा कि एक राजकुमारी मैना सुंदरी जिसका विवाह कुष्ठ रोगी के साथ कर दिया गया था। राजकुमारी ने अष्टानिका पर्व में सिद्धचक्र विधान किया और गंद्धोदक को पति के साथ अन्य 700 कुष्ट रोगियों पर डाला ओर उनके रोग दूर होंगये।

सिद्धों की आराधना एवं जिनाभिषेक के गंधोदक का इतना प्रभाव है, इसलिए जिसको भी जीवन में कोई कष्ट हो तो उन सभी का निवारण नित्य अभिषेक पूजन से किया जा सकता है ।दोपहर मेंश्रीजी को रथ में विराजमान कर आचार्य 108 वर्धमान सागर महाराज की फोटो को बग्गी में रखकर जुलूस निकाला गया। जिसमें प्रदीप पंचोलिया, आदित्य पंचोलिया, प्रशांत चौधरी, पंकज जटाले ने सुमधुर भजन प्रस्तुत किए। सभी भक्तों ने अपने घरों के सामने श्रीजी की आरती उतारी। रथ के सारथी बनने का सौभाग्य अशोक कुमार पंचोलिया परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं श्रीजी को रथ में लेकर बैठने का सौभाग्य पुष्पेंद्रकुमार पंचोलिया मोगावा वालो को प्राप्त हुआ। जुलूस पूरे नगर में भ्रमण कर वापस बड़ा जैन मंदिर पहुंचा। जहां पर रथ यात्रा का समापन किया गया।उसके बाद श्रीजी का पंचामृतअभिषेक किया गया।एवम रात्री में अचितन्य भईया ने शास्त्र प्रवचन किया तत्पश्चात श्री जी की आरती कर गुरुवरआचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के चित्र के के समकक्ष भक्ति की गई । इस दौरान समाज अध्यक्ष मनोज जैन, मुकेश जैन,प्रसांत चौधरी, श्रीमंदर जैन,किशोर जैन,शुधीर जैन,हर्षित जैन,रिंकेश जैन सहित सभी समाजजन उपस्थित थे।

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