जैन समाचार

अर्घ्य सागर जी महाराज का देवलोकगमन

AHINSA KRANTI NEWS


श्री वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर, सन्तोष नागर, गरियावास-उदयपुर में चातुर्मास कर रहे प्रज्ञाश्रमण मुनिश्री अमितसागर महाराज के शिष्य मुनिश्री अर्घ्यसागर जी महाराज की समाधि 19 सितबर रात्रि 11:11 पर हो गई। 
  मुनिश्री का जन्म 5 अप्रैल, 1935 में जिला मैनपुरी (उ.प्र.) में हुआ था। गृहस्थ जीवन मे नाम इंद्रभान जैन था। आपने ब्रह्मचर्य व्रत सन 2000 में प्रज्ञाश्रमण मुनि अमितसागर जी महाराज से लिया तथा त्यागमार्ग में कदम रखते हुए 2005 में क्षुल्लक दीक्षा इचलकरची में तथा 2010 में मुनिदीक्षा हस्तिनापुर में प्रज्ञाश्रमण मुनि अमितसागर महाराज से ली । 

  मुनिश्री सरल स्वभाव के हंसमुख तथा स्वाध्याय धर्मध्यान में रत रहते थे। आपने साधु जीवन मे अष्टमी-चौदस को उपवास व विभिन्न पर्वो में एक उपवास एक आहार की उत्कष्ट चर्या की। आपने गोमटेश्वर बाहुबली की प्रतिमा का अभिषेक देखा व गुरु आज्ञा का पालन करते हुए गुरु चरणों मे समाधि कर अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त किया। 85 वर्ष की आयु में उत्कृष्ट समाधि को आपने धारण किया। 
कोरोना काल के कारण अधिकतर भक्तजनों ने अपने घरों से ही मुनि श्री को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए ।  मुनिश्री के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार 20 सितबर,2020, प्रातः 8:00 मंत्रोचारण के साथ किया गया।

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