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अनुशासनहीनता अपने आप में अधर्म और पाप का लक्षण है : राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

AHINSA KRANTI NEWS

जोधपुर  26 सितंबर 2020  महावीर भवन निमाज की हवेली                जो व्यक्ति ज्ञान युक्त स्वयं का स्वयं पर अनुशासन करता है वही धार्मिक है यही विश्व के सभी धर्मों का मूल संदेश है इसका पालन करने वाले का ही धार्मिकता ने प्रवेश प्रवेश करने का अधिकारी होता है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने महावीर भवन निमाज की हवेली मैं भेंटवार्ता ने बताया कि अनुशासनहीनता अपने आप में अधर्म और पाप का लक्षण है 

       उन्होंने कहा कि जो स्वार्थ भय और लालच से अथवा मौत के डर से दबाव के कारण किसी अनुशासन का पालन करता है वह धर्म की परिधि में नहीं आता है        मुनि कमलेश ने कहा कि अनुशासनहीनता से आत्मा के साथ जो कर्मों का बंधन होता है उसको साक्षात परमात्मा भी मुक्त नहीं करा सकते          राष्ट्र संत ने स्पष्ट कहा की नियमों के पालन में आत्मा कर्मों से मुक्त होती है शरीर निरोग होता है और प्रकृति भी हमारे लिए वरदान बनती है   

       जैन संत ने कहा कि कोरोनावायरस की गाइडलाइन का पालन नहीं करने से किसी दूसरे का नुकसान नहीं है पालन नहीं करना अपने हाथ से अपने को मौत के मुंह में धकेलने के समान है प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है गाइडलाइन का अनुशासित होकर पालन करें और दूसरों से पालन करवाएं यही सबसे बड़ा वर्तमान का धर्म है

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