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अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत सांप्रदायिक सौहार्द दिवस का आयोजन

अहिंसा क्रांति / राजेंद्र बोथरा


आज अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के सप्तम दिवस  मुनि श्री अर्हत कुमार जी स्वामी आदि ठाणा ३ के सानिध्य अणुव्रत समिति हैदराबाद द्वारा सांप्रदायिक सौहार्द दिवस का आयोजन तेरापंथ भवन डी वी कालोनी सिकंदराबाद में किया गया। 


इस अवसर पर मुनि श्री अर्हत कुमार जी स्वामी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आज सांप्रदायिक सौहार्द की बहुत ही ज्यादा जरूरत हैं, क्योंकि आज विश्व में विभिन्न धर्मो में कट्टर वाद पनप रहा हैं। मेरा धर्म तुम्हारे धर्म से बेहतर बताने की होड़ में हम धर्म का मूल मंत्र सर्व धर्म समभाव को ही भूलते जा रहे हैं। छिलके बीना फल व भाषा बीना जैसे ज्ञान जैसे अधुरा हैं वैसे ही सांप्रदायिक आवरण के बीना धर्म भी परिपूर्ण नहीं हैं, पर आज हम नें संप्रदाय को महत्व देकर धर्म को गोण कर दिया हैं। इसी वजह से विश्व में कट्टर वादी सांप्रदायिकता पैर पसार रही हैं। धर्म हमें आपसी भाई चारा बढाने की प्रेरणा देता हैं पर हम धर्म के नाम पर विवाद फैला कर आपसी वैमनस्य को बढ़ा रहे हैं। मुनि श्री ने आगे कहा कि हम अधिकार के पहले दायित्व बोध को समझ ले तो धर्म का मर्म अपने आप समझ आ जाएगा। धर्म के नाम पर हम संतरे की तरह से बाहर दिखाई देने के लिए एक न बन कर खरबुजे की तरह अंदर से एक बनने का प्रयास करे तो सांप्रदायिकता की समस्या समाप्त हो सकती हैं। 


इस अवसर पर मुनि श्री भरत कुमार जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि तेरापंथ के नौवें आचार्य आचार्य श्री तुलसी ने समस्त विश्व में धर्म व जाति समुदाय से परे समाज में नैतिक, सांप्रदायिक सौहार्द व मानवीय एकता को बढाने के लिए इस अणुव्रत आंदोलन का  सूत्र पात किया। अणुव्रत के छोटे छोटे नियमों को जीवन में अपनाने से जीवन स्वच्छ व निर्मल बन जाता हैं, और अगर जीवन स्वच्छ व निर्मल बन गया तो समाज में सांप्रदायिकता सौहार्द अपने आप ही स्थापित हो सकता हैं। 
मुनि श्री जय दीप कुमार जी ने इस अवसर पर सांप्रदायिकता सौहार्द संबंधित गीत का संघान किया ।
अणुव्रत समिति के अध्यक्ष प्रसन्न भंडारी ने अपने स्वागत वक्तव्य में पधारे सभी का  स्वागत करते हुए सप्त दिवसीय कार्यक्रम में सानिध्य प्रदान करने के लिए मुनि वृंद के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।
इस अवसर पर पंडित भवानी शंकर केरिया, गौतम जैन(लोढा) व नवरत्न मल गुंदेचा ने भी अपने भावों की अभिव्यक्ति दी।


कार्यक्रम का प्रारंभ अणुव्रत समिति हैदराबाद के सदस्यों की गीतिका से हुआ। कार्य क्रम का संचालन करते हुए मंत्री प्रकाश एच भंडारी ने सांप्रदायिक सौहार्द पर अपने भाव को मुक्तक के द्वारा प्रकट करते हुए कहा कि -मंदिर में दाना चुग कर चिड़िया, मस्जिद में पानी पीती हैं,मै नें सुना है कि राधा की चुनरी, कोई सलमा बेगम सीती  हैं,एक रफी था जो महफिल महफिल, रघुपति राघव गाता था, एक प्रेमचंद बच्चों को, ईदगाह सुनता था।कृष्णा के गान गाते, रसखान सुनाई देता हैं,औरो  को दिखता होगा, हिंदू ओर मुसलमान,मुझे तो हर शख्स में, इंसान दिखाई देता हैं ।
मंत्री प्रकाश एच भंडारी ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया ।

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