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जब अपना मन पवित्र होता है हर चेहरे पर अपना ही चित्र होता है-मुनि श्री समता सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) -“जव अपना मन पवित्र होता है.. हर चहरे पर अपना ही चित्र होता है, दुनिया के किसी भी कौने में चले जाओ वह अपना ही मित्र होता है” उपरोक्त पक्तीयां मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने श्री पारसनाथ जिनालय में प्रातःकालीन धर्म सभा को सम्वोधित करते हुये कहे।

उन्होंने कहा कि विदिशा हमारे लिये कोई नया नहीं है, हां पीड़िया वदल गयी है जो कल तक के युवा थे वह वुजुर्ग नजर आने लगे है। भले ही आप लोगों के चहरे आजकल कोरोना के कारण ढंके है लेकिन पहचान में सभी आ रहे है। मुनि श्री ने कहा कि सुचिता सभी को अच्छी लगती है गंदगी से पर्यावरण भी प्रदुषित होता है।

उन्होंने कहा कि जैसे हम और आप व्यवहार में स्वच्छता और साफ सफाई को पसंद करते है जिससे आवोहवा अच्छी मिल सके। मुनि श्री ने कहा कि वर्तमान समय में साफ सफाई के प्रति प्रत्येक व्यक्ति जागरूक हुआ है। मुनि श्री ने कहा कि धर्म के क्षेत्र में गुरुवर आपको वार वार प्रेरणा साफ सफाई एवं स्वच्छता के लिये दे रहे हें। वाहर की सफाई के लिये भारत ही नही सारी दुनिया चिंतित है, इंसान के द्वारा किये गये अकृत्य कार्य के कारण ये महामारियां फैल रही है।

मुनि श्री ने कहा कि पृकृति की छेड़छाड़ के कारण उसके दुश्परिणाम सामने आ रहे है। मुनि श्री ने कहा पृकृति में जीना सीखो जितना अधिक आप पृकृति से प्रेम करोगे उतना अधिक आप लोग सुखी हो जाओगे। उन्होंने कहा कि अभी अभी चातुर्मास हेतु निवेदन किया गया है, उन्होंने कहा कि चातुर्मास कोई एक व्यक्ति नहीं कराता परिवार भी नहीं कराता वल्कि संपूर्ण जिनालयों के लोग कराते है,

मुनि श्री ने कहा कि लगभग दो ढाई किलोमीटर के ऐरिया में पूरा विदिशा सिमट जाता है, इसलिए चातुर्मास कंही पर भी हो आप सभी लोग ने जिस एकता अनुशासन के साथ नगर में प्रवेश कराया जिसकी सराहना न केवल जिला प्रशासन ने की वल्कि इसका संदेश पूरे भारत वर्ष में गया जिसका अनुसरण अन्य स्थान पर भी किया जा रहा है।

मुनि श्री ने कहा कि वर्तमान समय में जैनियों को अपनी आदतों में परिवर्तन लाना होगा। मुनि श्री ने कहा कि जो भी चौका लगाना चाहते है वह पहले अपने चौका को सैनेट्राईज करो। सैनेट्राईज वनाने के लिये नीम की पत्तीयाँ पानी में उवाल कर उस जल में ऐलम, कपूर और नीवूं के रस वना लैना चाहिए। जिससे आप भी स्वस्थ्य रहें एवं अन्य लोग भी स्वस्थ रह सके।

उन्होंने श्री पारसनाथ जिनालय के वास्तु की वहूत प्रशंसा की।अंत में उन्होंने कहा कि सवका साथ, सवका विकास,और सवका विश्वास, होंना चाहिए। उन्होंने कहा आज से अष्टान्हिका महापर्व प्रारंभ हो चुका है और इसीलिए एक संयोग श्री शीतलधाम में विराजमान भगवान श्री आदिनाथ स्वामी  का दर्शन कर मन प्रफुल्लित हो गया वंहा पर सभी लोगों ने शांतिधारा का भी अनुरोध किया गया। मुनि श्री ने कहा कि व्यवहार की पवित्रता, विचार धारा की पवित्रता के साथ चातुर्मास के आधार स्तंभ वनें।

इस अवसर पर ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री शीतलनाथ की भूमी पर आचार्य कुंद कुंद के लिखे ग्रन्थों का प्रकाशन हुआ यह पवित्र नगरी में आकर आज शीतलधाम के दर्शन किये। उन्होंने कहा प्रतिदिन देवदर्शन करना चाहिए।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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Mr. Devansh Jain

Bureau Chief - Vidisha Mob No: 7828782835

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