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प्रतेक आत्मा में समाई परमात्मा शांति : विराग सागर महाराज

*अहिंसा क्रांति / सोनल जैन
भिंड,,,,परम पूज्य संत गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज ने धर्म श्रद्धालुओं को प्रवचन लाभ देते हुए कहा संसार की बातों में 24 घंटे व्यतीत होते हैं जिनवाणी दुर्लभता से सुनने को मिलती है पर उपयोग या धारणा में ना होने के कारण लाभ नहीं ले पाते धर्म और उसके फल का महत्व ज्ञात होने पर श्रद्धा उमरती है जानकर उत्साह और रुचि बढ़ती है आत्म ध्यान की महिमा व फल जान लोगे तो दूसरी तरफ ध्यान ना जाएगा धर्म का स्वाद आए तो सारे रस नीरस लगते हैं प्राचीन काल में मुनि बनवासी होते थे जो जहां रहते हैं वही का उदाहरण देते हैं दिल दिमाग में वही बातें आती हैं
जो दृष्टि में आती हैं पूज्य पाद आचार्य का अधिकांश समय कर्नाटक में व्यतीत होता था सत्य में पंडित जी वही है जो आचरण में खरा उतरा हो पाप खंड पति पंडित पापों को गलाए वह पंडित है काट में अग्नि शक्ति रूप से पाई जाती है आत्मा का ध्यान करने से रासायनिक प्रक्रिया होती है फिर स्वयं की आत्मा ही परमात्मा बन जाती है परमात्मा बनने के लिए आत्मा की उपासना करना चाहिए उपासना यानी पूजा पाठ नहीं बिहान यदि स्वयं आदमी ध्यान करते करते एक दिन धेय के अभ्यास से निर्विकल्प ध्यान से आत्मा की शक्ति को परमात्मा में प्रकट कर सकते हैं अतः कुछ समय निकालकर जिनवाणी गुरुवाणी के द्वारा आत्मा में शक्ति रूप स्थिति परमात्मा के विषय में भी सुने समझे तथा श्रद्धा ज्ञान के द्वारा चारित्र की साधना द्वारा उसे प्रकट करने की भावना साधना करने का प्रयास प्रयत्न करें इस प्रवचनों को आप सुन सकते हैं विराग वाणी लाइव चैनल यूट्यूब एवं विराट आर्यिका  वेबसाइट के माध्यम सुन सकते हैं

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