जैन समाचार

उत्तम छमा धर्म से पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की शुरुआत

सनावद:- सहनशीलता क्रोध को पैदा न होने देना। क्रोध पैदा हो ही जाए तो अपने विवेक से, नम्रता से उसे विफल कर देना। अपने भीतर क्रोध का कारण ढूंढना, क्रोध से होने वाले अनर्थों को सोचना, दूसरों की बेसमझी का ख्याल न करना। क्षमा के गुणों का चिंतन करना ही उत्तम छमा कहलाता है। उक्त उध्बोधन सनावद में चातुर्माश रत डॉ. आचार्य श्री 108 प्रणाम सागर जी महाराज ने पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के प्रथम दिन कही।

प्रवक्ता सन्मति जैन काका ने बताया की पर्युषण पर्व के प्रथम दिन उत्तम छमा के दिन श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर जी में पंचामृत अभिषेक किया गया सांति धारा व सामुहिक पुजन आचार्य श्री के मुखबिंद से सम्पन्न होई। व अगली कड़ी में आचार्य श्री नेउत्तम छमा धर्म का महत्व समजाते हुवे अपनी वाणी से सभी को रस पान करवाया। वही दोपहर में तत्त्वार्थसूत्र की क्लास आचार्य श्री ने ली एवम शाम को आनंद की यात्रा प्रश्न मंच किया गया व बड़ी भक्ति भाव से सभी समाजजनों ने मिलकर जिनेंद्रदेव की आरतीभक्ति की ।

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