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जिसने अपने मन पर विजय प्राप्त कर ली वह हर स्थान पर विजय प्राप्त कर सकता है -मुनि श्री समता सागर जी महाराज

यूट्यूब लाइव के माध्यम से ऑनलाइन चल रही क्लास व प्रवचन

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन
विदिशा(भद्दलपुर) – विना विचारे जिव्हा के आधीन होकर यदि आपने अपने पेट का साथ दिया तो यह शरीर आपका ज्यादा समय साथ नहीं दे पाऐगा। उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम से ओन लाईन सम्वोधित करते हुये व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि भजन भोजन और शयन तो कम से कम निश्चित समय जो आपका है, उसी समय कर लैना चाहिये। प्रातःकालीन दिनचर्या की शुरुआत यदि अच्छे से हो जाती है, तो दिन भर अच्छे से वीतता है, इसलिये समय साधन और स्थान का हमेशा ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम चल रहे है, और कांटा चुभ गया?
-क्यूं चुभा क्यूं कि हम देखभाल कर नहीं चले तो इसमें दोष आखिर किसका है? दोष हमारा अपना ही है, और हम दोष कांटे को दैं तो यह अज्ञानता ही है। इसलिये हमारी प्रत्येक क्रिया में सावधानी होंना चाहिये।
उन्होंने कहा कि “मन” ही है जो इस पूरे शरीर में पंचेन्द्रिय का संचालन करता है, इसलिये मन का राजा कहा गया है, जो कि अच्छे, वुरे, और सर्दी गर्मी का अहसास कराता है, जिसने अपने मन पर विजय प्राप्त कर ली वह हर स्थान पर विजय प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि संसार में ज्ञान की और ज्ञान दैने वालों की कमी नहीं है, लेकिन कौनसा ज्ञान और किससे लिया जाए? ज्ञानी जीव तो हंस के समान होते है जो सार तत्व को ग्रहण करते है और असार को छोड़ देते है।
मुनी श्री ने कहा कि यह शरीर अपनी स्थिति को लेकर और आयुकर्म को लेकर आता है, इसलिये मृत्यु से मत डरो। पल पल सांस को ले रहे हो और पल पल इस स्वांस को छोड़ रहे हो यह शरीर तो एक दिन छूटना ही है, जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यू भी निश्चित है, तो फिर इस शरीर से इतना मोह क्यू?  इसलिये मृत्यू से भय खाने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक चेतना को जो लोग समझ लेते है, वह कभी भी मृत्यु से भय नहीं खाते। उन्होंने कहा कि ज्ञान से ही शरीर और आत्मा के इस अंतर को पकड़ सकते है, ज्ञान का ही फल है जो आपको सुख दैने वाला होता है।
उन्होंने कहा कि एक आध्यात्म ही है, जो शरीर और आत्मा की इस गुत्थी को सुलझा पाया है, भले ही आज विज्ञान ने खूव प्रयोग कर लिया है, लेकिन वह शरीर और आत्मा के इस विज्ञान की गुल्थी को आज तक नहीं समझ सका है। वहूत से शोध किये लेकिन  कोई भी वैज्ञानिक इस जीवात्मा को आजतक नहीं पकड़ पाया है।
उन्होंने कर्म वंध की चर्चा करते हुये कहा कि भले ही शरीर और आत्मा दौनों जुदा है, लेकिन दौनों एक मेव होकर के ही कर्म वंध को करते है। जैसे चूना और हल्दी को मिलाओ तो लाल रंग वनता है, -क्या चूना लाल है,? क्या हल्दी लाल है? नहीं दौनों की मिश्रित अवस्था का रंग लाल है, उसी प्रकार यह जीवात्मा है।
उपरोक्त जानकारी चातुर्मास कमेटी के मीडिया प्रभारी अविनाश जैन ने वताया जैन तत्ववोध की ओन लाईन कक्षा प्रातःकाल8:15 से चल रही है।प्रवचन के उपरांत 15 मिनट जिज्ञासा समाधान के लिये दिया जाता है, जिसमें पूरे भारत से श्रद्धालु अपनी जिज्ञासाओं को ओन लाईन भेजकर समाधान पा रहे है।
~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश
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