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भारतदेश की आत्मा में राम वस्ते है -मुनि श्री समता सागर जी महाराज

यूट्यूब लाइव के माध्यम से ऑनलाइन चल रही क्लास व प्रवचन

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

 

विदिशा(भद्दलपुर) – भारतदेश की आत्मा में राम वस्ते है,अयोध्या आज सिद्द भूमी नही वनने जा रही, अयोध्या तो भगवान आदिनाथ से लेकर कई तीर्थकंरों की सिद्ध भूमी है, उसे सिद्ध क्या करना है? वंहा पर एक ऐसा ऐतिहासिक मंदिर वनेगा जो युग युगांतर तक याद किया जाऐगा।

उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने ओन लाईन प्रवचन सभा में व्यक्त किये।उन्होंने दान के महत्व को दर्शाते हुये कहा कि दान दैनै वाले दान देते है,और वनाने वाले वनाते है,प्रतिष्ठा के पहले भगवान को या मंदिर को कोई एक आदमी विराजमान करता है, लेकिन प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत भगवान सभी के हो जाते है। इतिहास में जितना महत्व तपस्वियों का होता है, उतना ही महत्व श्रावकों का एवं दान दातारों का भी रहा है,

उन्होंने कहा कि अपनी समपत्ती का उपयोग व्यक्ती अपने लिये अपने परिवार अपने रिस्तेदारों के लिये तो करते है, लेकिन विरले लोग ही ऐसे होते है जिनका धन समाज तथा राष्ट्र के स्मारक वनाने के लिये लगता है।

भारतवर्ष का इतिहास साक्षी है कि यंहा पर वड़े वड़े दान दातारों ने समय समय पर अपना दान दिया है, और उन्ही के माध्यम से वड़े वड़े धार्मिक स्थल खड़े किये गये है, और किये जा रहे है, और आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की प्रेरणा से शीतलधाम में भगवान शीतलनाथ जी का यह विशाल समवसरण तैयार किया जा रहा है, जिसकी कला कौशल सिर्फ विदिशा के लिये नही वल्कि भारत के इतिहास में हजारों हजार वर्षों के लिये सुरक्षित रहेगी।

उन्होंने जैन तत्व वोध व्याख्यान माला के प्रमुख अंश की वात करते हुये कहा कि कल हमने शुद्ध भोजन की वात की थी और आज हम भोजन के साथ साथ स्थान की शुद्धि की वात करने जा रहे है। आपका भोजन शुद्ध है, तो क्षेत्र की भी शुद्धि भी होंना चाहिये। जैसे शराब की दुकान पर वंहा वैठकर यदि दूध पी रहे हे,


तो भी आपसे यही कहा जाएगा कि आप शराब पी रहे थे क्या? फिर आप कितनी भी सफाई दो तो कोई आपकी मानने वाला नही है। मुनि श्री ने कहा इसलिये द्रव्य के साथ क्षेत्र शुद्धि की वात कही गई है, भले ही आपका दृव्य शुद्ध हो लेकिन क्षेत्र अशुद्ध होगा तो आरोप आप पर लगेगा ही लगेगा इसलिये इस वात का ध्यान एक अखवार वालों को भी रखना चाहिये। उन्होंने कहा कि एक साहित्यकार अपनी कलम से लोगों की भावनाओं को भड़का भी सकता है, और वही भड़के हुये वातावरण को शांत करने में भी मदद करते है।

उन्होंने कहा कि लोग हमसे पूंछते है महाराज हम सव कुछ अच्छा करते है लेकिन फिर भी आज हम पिछड़ रहे है उसका कारण है कि हमने महल तो खड़े कर दिये लेकिन क्षेत्र की शुद्धि का ध्यान नहीं रखा।

शीतलधाम के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया आज की ओन लाईन प्रवचन सभा का शुभारंभ भगवान श्री आदिनाथ स्वामी के चित्र एवं आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन हरीभूमी विदिशा के व्यूरोचीफ अटल तिवारी ने किया। एवं मुनि श्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर चातुर्मास कमेटी की ओर सेउनका स्वागत श्री वसंत जैन अध्यक्ष चातुर्मास कमेटी एवं शीतल विहार न्यास तथा , श्री पारस जैन अमरावती, प्रवक्ता अविनाश जैन ने किया।

इस अवसर पर दीप प्रजजवलन में जैन मिलन के कार्यकर्ता अतुल जैन, वैभव जैन,शेलेन्द़ अतिशय सहित नगर से यू पी एस सी में सफलता पाने वाले अंकित जैन के दादाजी सागर मल जी, जैन ने उपस्थित होकर दीप प्रजजवलन में सहयोग किया।

 

प्रतिदिन 8:30 से 9:30 तक ओन लाईन प्रवचन एवं जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम किया जा रहा है, जिसमें भारतवर्ष के विभिन्न प्रातों के एवं विदिशा नगर के जिज्ञासुओं द्वारा प्रश्न पूंछे जाते है जिसका जबाब भी मुनि श्री के द्वारा ओन लाईन देकर समाधान किया जाता है।

 

इस वर्ष चूंकी कोरोना काल है वाहर से श्रावको एवं श्रद्धालुओं को भी आने पर प्रतिवंध है, तो सभी श्रावक एवं श्रद्धालु घर पर ही लिंक के माध्यम से धर्म लाभ ले रहे है, एवं जिनालयों में शोसल डिस्टेंस एवं मूंह पर मास्क लगाकर ही क्रमशः पांच लोग ही अभिषेक एवं पूजन करते है।

मंदिर के गर्भ गृह में पुजारी के अलावा किसी को भी जाने की एवं प्रतिमा जी को छूने की इजाजत नहीं है। एवं मुनिसंघ को भी मास्क लगाकर एवं दूर से ही नमोस्तु करने की इजाजत है,आहार चर्या में भी संख्या सीमित है तथा जो लोग दुकान आदि पर या वाजार में आ जा रहे है उनसे भी आहार नही लेते।

 

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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