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आहार शुद्धि से ही जीवन शुद्धि संभव : श्री चन्द्रप्रभ

AHINSA KRANTI NEWS

 

 

जोधपुर। राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ जी महाराज ने कहा है कि हर किसी व्यक्ति को अपनी भावनाओं को सुन्दर बनाए रखना चाहिए। जैसे हमारे भाव होते हैं, वैसे ही हमारा भव होता है। सुन्दर चेहरे से सौ गुना महान आदमी का चरित्र होता है। दुनिया में कोई भी महापुरुष अपने चेहरे के कारण नहीं अपितु बड़ी सोच और श्रेष्ठ चरित्र के कारण महान बनें। आइने के सामने तो हर कोई सजता-सँवरता है, लेकिन जरूरी यह है कि आदमी अपने चेहरे के साथ-साथ अपने चरित्र को भी सँवारता रहे।
श्री चन्द्रप्रभ कायलाना रोड स्थित संबोधि धाम में फेसबुक पर लाइव प्रवचन देते हुए देशभर के श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें सदा सात्विक जीवन जीना चाहिए। हमारा भोजन भी सात्विक हो, हमारी मानसिकता भी सात्विक हो और हमारी धन-सम्पती भी सात्विक हो। उन्होंने सात्विक आहार पर जोर देते हुए कहा कि आहार शुद्धि से ही व्यक्ति की सत्त्वशुद्धि होती है। इंसान जैसा अन्न खाता है वैसा ही उसका मन रहता है। अन्न का प्रभाव तन पर पड़ता है, तन का प्रभाव मन पर पड़ता है, मन का प्रभाव हमारी प्राणशक्ति पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमें सूर्योदय के बाद ही अन्न ग्रहण करना चाहिए और सूर्यास्त से पूर्व तक भोजन स्वीकार कर लेना चाहिए। एक बार भोजन करने के बाद दूसरी बार भोजन लेने में 3 घंटे का अंतराल जरूर रखना चाहिए।

 

 

 

संतप्रवर ने कहा कि हमें बाजारू भोजन से बचना चाहिए। घर पर निर्मित्त खाद्य पर्दाथों का ही सेवन करना चाहिए। अभी लॉकडाउन के दौरान लोगों ने बाजार का भोजन नहीं खाया और घर का शुद्ध भोजन खाया तो लोग पेट संबंधित कई रोगों से बचे रहे। राष्ट्र-संत ने उदारता का भाव जीवन में ग्रहण करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हमें हमेशा केवल अकेले ही नहीं खाना चाहिए अपितु औरों को खिलाने का भी सौभाग्य लेना चाहिए।
संतोष व्रत को धारण करने की प्रेरणा देते हुए राष्ट्र-संत ने कहा कि संतोष यदि जीवन में आ जाए तो पैसा वरदान बन जाता है वहीं तृष्णा और लालच आ जाए तो वही धन श्राप बन जाता है। 99 के फेर में पडऩे के बाद व्यक्ति का लालच और बढ़ता है। हमें सावधान रहना चाहिए कि धन कमाते हुए किसी की बद्दुआ न लगे, गलत तरीके से कमाया हुआ धन घर में आएगा तो उसके परिणाम भी गलत आयेंगे।

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