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JAIN NEWS- स्वास्थ्य का मूलाधार संयमित जीवन शैली : देवेंद्रसागरसूरि

AHINSA KRANTI NEWS

हम अस्वस्थ होते हैं तो उपचार कराते हैं और चिकित्सक के परामर्श के अनुसार परामर्श लेते हैं। तरह-तरह की चिकित्सा प्रणालियों और औषधियों का सेवन करने पर बाध्य होते हैं। इन सारी प्रक्रियाओं के बीच जहां हमारी जीवन-शक्ति का क्षय होता है वहीं हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता का भी पतन होता जाता है और रोग हमारे जीवन पर हावी होकर हमें विवश बना देते हैं। ऐसे में यदि हम अपनी जीवन शैली को संयमित और नियमित रखते हुए संयमित जीवन शैली को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बना लें तो हम सारी शारीरिक व्याधियों और मानसिक विकारों से मुक्ति पा सकते हैं।


उक्त प्रेरणादायी विचार आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरीश्वरजी ने बुधवार की सुबह   श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन प्रदान करते हुए व्यक्त किए। संयमित जीवन शैली और नियमितता को निरोगी जीवन के लिए सर्वश्रेष्ठ बताते हुए आचार्य श्री ने कहा  इस दिशा में पहल का श्रीगणेश आज से ही करें तथा सबसे पहले अपनी व अपने परिजन की दिनचर्या तथा जीवन पद्धति को सुधारें ताकि दूसरे भी उससे प्रेरित हों और समाज व देश में उस अच्छे व आदर्श माहौल का निर्माण संभव हो सके बारिश में भीगकर सर्दी का उपचार कराने से बेहतर है कि बारिश आने के पूर्व ही छाता लगाकर अपना बचाव कर लिया जाए।रोगी होकर चिकित्सा कराने से अच्छा है कि बीमार ही न पड़ा जाए। आयुर्वेद का प्रयोजन भी यही है। स्वस्थ के स्वास्थ्य की रक्षा एवं रोगी के रोग का शमन।

आयुर्वेद की दिनचर्या, ऋतुचर्या, विहार से सम्बन्धित छोटे-छोटे किन्तु महत्वपूर्ण सूत्रों को अपने दैनिक जीवन में सहज रूप से धारण कर हम अपने आपको स्वस्थ एवं निरोगी बनाए रख सकते हैं. जीवन में हर कदम पर प्रतिस्पर्धा होती है। प्रत्येक व्यक्ति दूसरे की बराबरी करना चाहता है चाहे वह स्कूल या कॉलेज स्तर पर हो या जीवन में स्वास्थ्य शैली को बनाए रखनी की हो। लोगों को इस तथ्य को पहचानना चाहिए कि स्वास्थ्य पहले है। हम यह सब तभी कर सकते हैं जब हम स्वस्थ होते हैं और जीवन के अन्य पहलुओं पर बेहतर काम करते हैं। 

Mukesh Nahar

Editor-in-Chief | ahinsakranti@gmail.com | 9021899800 Jodhpur, Rajasthan

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