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यदि समाज में साधु न हों तो संस्कारों का वीजारोपड़ कौन करेगा? – मुनि श्री समता सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) – “वर्षा न हो तो किसानी नही हो सकती और किसानी न हो तो अनाज कंहा से आऐगा? उपरोक्त उदगार मुनि श्री समता सागर जी महाराज ने शीतलधाम पर व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि जिस राष्ट्र में यदि अनाज की पैदावार न हो तो वह राष्ट्र कमजोर हो जाता है, उसी प्रकार यदि समाज में साधु न हों तो संस्कारों का वीजारोपड़ कौन करेगा?

उन्होंने कहा कि चातुर्मास में साधु जन तो अपनी तपस्या करते ही हैं लेकिन उनके तप के प्रभाव से समाज भी लाभान्वित होती है। जो लोग कभी एक फर्स पर एक साथ नहीं वैठ पाते है, साधुओं के आने से उन सभी में आपसी सौहार्द वड़ता है,तथा दूरीयां कम हो जाती है।

उन्होंने कहा कि विगत १५ दिनों हमने स्वं एवं ऐलक जी ने विदिशा नगर के सभी जिनालयों की वंदना कर उन कालौनिओं में रहने वाले युवाओं को और समाज वंधुओं को जोड़ने का उनको संस्कारित करने का  प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि सभी पुराने लोग तो परिचित है तथा जानते है, लेकिन युवा पीड़ी जो कि परिचित नहीं में उनसे परिचित होंना चाहता हुं।जिससे लांक डाऊन के इस काल का भरपूर् लाभ उठा सकें। और शायद आचार्य श्री ने हम दोंनो महाराज को यंहा भेजा है।

उन्होंने कहा कि विदिशा नगर में सन् 1992 में मुनि श्री क्षमासागर जी के साथ चातुर्मास किया एवं 1995 में ग्रीष्मकालीन वांचना तथा सन् 2000 में मुनि श्री प्रमाण सागर जी के एवं ऐलक जी के साथ उदयगिरि का चातुर्मास संपन्न कर चुके है। विदिशा में हालांकि वहूत वढ़े वड़े धार्मिक आयोजन सफल हो चुके है,

लेकिन रविवार को जो चातुर्मास की कलश स्थापना झमाझम वारिस के वीच हुई, वह भी ऐतिहासिक था भले ही वाहर के लोग नहीं आ पाऐ लेकिन स्थानीय समाज ने इसका पूरा लाभ उठाया। और शोसल डिस्टेंस के साथ प्रभु जी की भक्ती, प्रवचन और आहार चर्या का लाभ उठाया।

 पूर्व के चातुर्मास की स्थापना की उन यादों को भी ताजा करते हुये चातुर्मास की उपयोगिता को वताते हुये कहा ‘वर्षाकाल में सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति हो जाती है, जीव रक्षा के उद्देश्य से सभी जैन संत एवं त्यागी व्रती एक ही स्थान पर रहकर धर्म साधना करते है ,जिससे उन सूक्ष्मकाय जीवों की हिंसा से वच सके”

उन्होंने कहा स्थान की शुद्धि के उपरांत शीतलधाम में महामंगल कलशों की स्थापना के वाद आज वीर शासन जयंति के अन्तर्गत प्रथम दिवस प्रातःकालीन वेला में भगवान श्री आदिनाथ स्वामी वर्रो वाले वावा की छत्रछाया में शीतलधाम पर भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा विना कोई वोली के सभी मुख्य पात्रों के द्वारा संपन्न की गई, व्रह्मचारी भाइओं के सहयोग से सभी मुख्य पात्रों ने  श्री भक्तामर महामंडल विधान का आयोजन कर अपनी विशुद्धि को और वड़ाया।

श्री शीतल विहार न्यास के प्रवक्ता अविनाश जैन ने धर्मसभा का संचालन करते हुये वताया प्रारंभ में मंगलाचरण सुधा चौधरी ने किया एवं तत्पश्चात दीप प्रज्जवलध कर शास्त्र भेंट मुनिसंघ के कर कमलों में एस के जैन पूर्व प्राचार्य जैन महाविद्यालय के द्वारा की गई।

मुनिसंघ के मंगलवार से प्रवचन एवं कक्षाऐं श्री शांतिनाथ दि. जैन मंदिर स्टेशन माधवगंज में होंगी एवं मुनिसंघ का रात्री विश्राम शीतलधाम ही रहेगा। प्रातःकालीन कक्षा सिर्फ युवकों के लिये 7:45 से 8:30 वजे तक तत्पश्चात सामान्य प्रवचन 8:45 से 9:45 तक 10 वजे से  आहार चर्या दौपहर में 3:30 से4:30 तक मूलाचार की कक्षा। सांयकालीन गुरुभक्ती एवं प्रश्नमंच 6:30 से शीतलधाम पर ही संपन्न होंगी।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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