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गुरु वो है जो दुःख और सुख को शांति में बदल दें-आचार्य मणिप्रभ

AHINSA KRANTI NEWS

मांडवला।
श्री जिनकांतिसागरसूरि स्मारक ट्रस्ट एवं जहाज मंदिर चातुर्मास समिति-2020 द्वारा आयोजित चातुर्मास के अंतर्गत हो रहे जहाज मंदिर परिसर के प्रवचन हॉल में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में आयोजित प्रवचन में पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सच्चा गुरु वो है जो हमारे दुःख और सुख को शांति में बदलने की क्षमता रखता है। गुरू के प्रति कृतज्ञता का भाव और उनसे आशीषों की प्राप्ति ही हमें प्रभु प्राप्ति का सहज मार्ग दिखाती है। कोषाध्यक्ष प्रकाश छाजेड ने विज्ञप्ति में बताया कि आचार्य महाराज ने प्रवचन में कहा कि गुरू गोविन्द दोउ खड़े का के लागूं पाय…. दोहों की विषद व्याख्या करते हुए कहा कि हमारे प्रति किसी के भी द्वारा किये गये उपकार को भूलना कृतघ्नता है।

उपकारी के प्रति सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए। आचार्यश्री जी ने कहा कि जीवन का लक्ष्य प्रभु की खोज है और गुरू हमें कषाय से मुक्त कर दुविधा के भंवरजाल से उबारता है। सच्चा गुरू दुःख और सुख दोनों को ही शांति में बदलने की क्षमता रखता है। जीवन में शांति के अहसास के बिना प्रभु प्राप्ति का मार्ग नहीं मिलता। कर्त्ताभाव हमें अहंकार की ओर ले जाता है जबकि समर्पणभाव हमें कृतज्ञ बनाता है। उन्होंने कहा कि हमें गुरु बनाना पड़ता है और शिष्य बनना पड़ता है। चिन्तन, मनन और समर्पण के बगैर शिष्य बनना संभव नहीं है। नरेन्द्र ने गुरू रामकृष्ण परमहंस को अपने आत्म समर्पण के द्वारा ही प्राप्त किया और उनके निर्देश में चलकर ही स्वामी विवेकानन्द बने।

आचार्यश्री ने कहा कि ईश्वर को छोड़कर सभी अपूर्ण है अधूरेपन का अहसास हमें पूर्णता पाने के लिए पुरुषार्थ की प्रेरणा देता है। गुरू के प्रति सच्ची श्रद्धा और समर्पण रखकर ही प्रभु की प्राप्ति संभव है। समर्पण के कागज पर श्रद्धा की स्याही से हृदय की कलम से लिखा गया प्रभु के प्रति आमंत्रण ही हमें संपूर्णता की ओर ले जाती है जो गुरू के बिना संभव नहीं है। गुरू की महिमा, उनका ज्ञान, उनका मार्गदर्शन, उनका आशीष ही उन्हें प्रभु से भी अधिक श्रेष्ठ बनाकर पूजनीय बनाता है। गुरूपूर्णिमा के विशेष अवसर पर गुरूपूजन का विशेष कार्यक्रम दोपहर में आयोजित किया गया जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।  

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