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मैत्री भाव तो सभी जीवों से रखा जाता है-मुनि श्री समता सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर)-दोस्ती परिचितों से की जाती है, लेकिन मैत्री भाव तो सभी जीवों से रखा जाता है।भले ही वह आपका दुश्मन या आलोचक ही क्यों न हो।  उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने किला अंदर स्थित वड़ा जैन मंदिर में जिन मंदिर वंदना के अवसर पर प्रथम दिवस व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि जिनवंदना का कार्यक्रम निश्चित हुआ तो सवसे पहले क्रम किलाअंदर के वड़ा जैन मंदिर को दिया गया जैसे परिवार में वड़े का महत्व होता है उसी प्रकार इस वड़े जैन मंदिर का भी महत्व है जो लगभग चार सौ वर्षों से अधिक पुराना है।

मुनि श्री ने कहा जब हम पहलीबार सन् 1992 में पूज्य समाधिस्थ मुनि श्री क्षमासागर जी और अनुज मुनि श्री प्रमाण सागर जी के साथ आए थे तो सवसे पहले इसी वड़े जैन मंदिर में आए थे। मुनि श्री ने कहा कि यदि आपको अपने जीवन में कुछ  वनना है, तो सदैव अपने से वड़ों का सम्मान करो।

उन्होंने कहा कि जो कार्य करता है उसी की आलोचना अधिक होती हे, आलोचना से अपने अंदर के दोषों में सुधार आता हैं, अच्छा वनना और अच्छे करने में वहूत अंतर है, यह जरूरी नही है कि जो अच्छा दिख रहा है, वह अंदर से भी उतना अच्छा हो। यदि आप अपने अंदर के दोषों से मुक्त होंना चाहते हो तो अपने आलोचकों को सदैव अपने पास रखो।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पक्ष के साथ विपक्ष का होंना भी उतना जरूरी है, यदि  विपक्ष न हो तो सत्ता पक्ष मनमानी करने लगता है, जो अच्छे लोकतंत्र का परिचायक नहीं होता। पक्षी आकाश में तभी उड़ पाता है जब उसके पास दोनों पंख होंं उसी प्रकार विचारों की उडान के लिये व्यक्ति का स्वतंत्र होंना भी जरूरी है।

उन्होने मुनि श्री शीतल सागर जी महाराज जिनका जन्म इसी किलाअंदर के श्री सतभैया परिवार में हुआ।और इस युवा इंजीनियर ने सर्विस करते करते ही ऋषी से मुनि वनने का मार्ग  चुन लिया। उन्होंने कहा कि हालांकि उनकी साधना तो काफी समय पहले से चल ही रही थी लेकिन आचार्य श्री का 2014 के चातुर्मास का ऐसा सुयोग मिला कि  शीतलधाम पर आचार्य श्री के पड़गाहन के लिये गये थे लेकिन स्वं शीतल सागर वन गये।

उन्होंने इस परिवार की प्रशंसा करते हुये कहा कि जिस परिवार में धर्म श्रद्धालु  रहते है उसी परिवार के वेटे वेटियां ही मुनि और आर्यिका वनते है, उन्होंने कहा कि हम लोगों ने तो सुना है लेकिन आप लोगों ने तो चातुर्मास का लाईव टेलीकास्ट देख ही चुके है।

मुनि श्री ने कहा कि वर्तमान समय में चातुर्मास की चर्चा चल रही है, चातुर्मास किसी भी स्थान पर हो लेकिन उसका फायदा तो पूरी जैन समाज को ही मिलता है। मुनि श्री ने कहा कि अभी निश्चित नहीं हे कि चातुर्मास कंहा पर होगा लेकिन जंहा पर भी होगा सभी लोग अपने आपको इस चातुर्मास से वांध कर रखें।

इसी क्रम में नगर के सभी जिनालयों की वंदना करने का निर्णय लिया है जिससे सभी जिन मंदिरों के आस पास रहने वालों को धर्म लाभ मिल सके। मुनि श्री ने कहा आज वड़े मंदिर का दिन है, कल छोटा मंदिर का दिन है।हालांकि दौनों मंदिर आस पास है, इसलिए दोनों दिन किला अंदर वालों के लिये है।

इस अवसर पर ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज ने समयसार की व्याख्या करते हुये कहा कि  सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र में मुनिराज लीन रहते है, उन्होंने कहा कि समय सार की वात करना अलग है लेकिन समयसार में जीना अलग है। आचार्य श्री को देख लो तो उनकी चर्या ही जीवन्त समयसार नजर आती है।

उन्होंने कहा कि आज स्वार्थ वस समय सार की लाईन को ही वदल देते है, जो लाइन प्रयोजन भूत है उसे अंडर लाईन कर लेते है, और जो उनके निष्प्रयोजन लगती है उनको अंडर ग्राउंड कर देते है। उन्होंने कहा कि हालांकि 20 साल पहले हम उदयगिरि के चातुर्मास में मुनि श्री के साथ थे लेकिन 20 साल वाद आऐ है तो वह युवा आज वुजुर्ग हो गये है और एक नई पीडी़ सामने आ चुकी है। ऐलक श्री ने सभी युवाओं को धर्म के इस मार्ग से जुड़ने की अपील की।

इस अवसर पर मुनिसंघ एवं श्री शीतल विहार न्यास के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया कि जिन वंदना के शुभ अवसर पर प्रथम दिन मुनि संघ ने जंगल जाते समय पुल पर से चरण तीर्थ का अनुपम सुन्दर दृश्य का अवलोकन किया। श्री शीतलनाथ वड़ा जैन मंदिर किला अंदर, एवं छोटा जैन मंदिर के दर्शन किये।

कार्यक्रम में श्री दिगंबर जैन वड़ा मंदिर ट़स्ट कमेटी की और से मुनिसंघ से वड़ा जैन मंदिर में चातुर्मास हेतु निवेदन किया गया। इस अवसर पर श्री सकल दि. जैन समाज के पदाधिकारियों के साथ वड़े जैन मंदिर टृस्टी  प्रकाश सिंघई, सुरेश सतभैया,अतुल जैन, कमल ओड़ेर,डा. मख्खन लाल जैन, ने दीप प्रज्वलित किया।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

Mr. Devansh Jain

Bureau Chief - Vidisha Mob No: 7828782835

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