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जीभ बिना हड्डी वाली होने के बावजूद कई लोंगों की हड्डीयाँ तोडने की ताकत रखती है : आचार्य भव्यदर्शन सूरीश्वर

AHINSA KRANTI NEWS
मैसूर । 8 अगस्त 2020 श्री सुमतिनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के तत्त्वावधान में महावीर भवन में चातुर्मास बिराजित आचार्य भव्यदर्शन सूरीश्वर तथा साध्वी भद्रिकाश्रीजी म. ने धर्म संदेश मे बताया कि – आज-कल सबसे ज्यादा परतन्त्रता- पारधीनता- गुलामी इंसानों में देखने को मिलती है – जीभ की ! बिना हड्डी वाली होने के बावजूद कई लोंगों की हड्डीयाँ तोडने की ताकत रखती है। जैनशास्त्र के मुताबिक चारपल वजन वाली और सात अंगुल यानी करिब पांच इंच लंबी जीभ होती है । पहलवान को ये जीभ नचाती है । खास अहमबात वो भी है कि – जीभ का काम बोलना और खाना ये दोनों काम वो करती है ।
जीभ के ऊपर विजय जो प्राप्त करता है वो ही सही विजेता कहलाता है । गाली देने का काम भी जीभ का है तो सन्मान देने का-सत्कार करने का काम भी यही जीभ का है । कई बार खाना जिसका खाती है । उसकी ही निंदा यह जीभ करती है । जीभ जब फिसलती है तब कुछ न कुछ बोल देती है । उस के कारण जीव को मार खाना पड़ता है, सहना पड़ता है ।
जीभ को रोज खाना खिलाना फिर भी उसको बस में रखने के लिए जैनधर्म में आयंबिल का तप बताया है । जो लंबे समय तक कर सकते है । उपवास लंबे समय तक करना संभवित नहीं है । ऋषभ भगवान की लडकी सुंदरीने 60,000 साल तक लगातार आयंबिल किये थे । जैनों में वर्धमान तप की 100 ओली की और चैत्र-आसोज की शाश्वती ओली की आयंबिल से होती है और इनकी संख्या भी लाखों में है । आयंबिल का तप मंगलिक गिना जाता है । मंगलिक का मतलब है – अपमंगल-विघ्नों को दूर करने वाला ।
नजदीक के भूतकाल में एक ऐसे आचार्यभगवंत हो गए जिन्होंने अपने जीवन में करीब 35 साल से ज्यादा यानी 100 +100+89 ओली की थी । सौ ओली में 5050 आयंबिल और 100 उपवास होते है । भगवान प्रेमसूरीश्वरजी म. के वे शिष्यरत्न थे । वर्धमान तप का उन्होंने विश्वविक्रम स्थापित किया था । रेकार्ड बना दिया था ।
अभी एक साध्वीजी म. है । उनका नाम है सा. श्री हंसकीर्तिश्रीजी म. । उन्होंने तो 100+100+100+50 से ज्यादा ओली करके सबका रेकार्ड तोड़ दिया है ।
दुष्कर तप करने वालों की हार्दिक अनुमोदना !
आज पू.आ.भ.विजयराजतिलक सूरीश्वरजी म. की 22वीं पुण्यतिथि पर उनके चरणों में कोटिशः वन्दना ।
-आचार्य भव्यदर्शनसूरीश्वर ।

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