आत्मा की सिद्धि हो तो सिद्ध पद की प्राप्ति संभव है : विराग सागर महाराज

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अहिंसा क्रांति / सोनल जैन

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भिंड,। परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी माहामुनिराज जिन्होंने “ना छुओ,ना छूने दो”जियो और जीने दो का महत्वपूर्ण सूत्र देकर कोरोना जैसी महामारी पर विजय दिलाई उन्होंने अपने श्री मुख से वाणी का पान कराते हुए कहा आत्मा की सिद्धि हो तो सिद्ध पद की प्राप्ति संभव है पंचमूल्यों से आत्मा ना तन का निर्माण होता है ऐसी मान्यताएं वाले शिष्यों को कहते हैं
अपने यहां कहते हैं दाल बनाते समय चूला पृथ्वी अग्नि जल है हम भी हैं पांचवा आकाश है जो सर्वत्र व्याप्त है आत्मा अजन्मा है तो मरण से भी रहित है स्वर्ग मोक्ष सब का अस्तित्व है कार्यों के कारण कोई सुखी कोई दुखी कोई अमीर कोई गरीब कोई रोता कोई हंसता है शुद्ध होने की क्षमता आत्मा में है पुरुषार्थ करके कर्म 6 द्वारा निर्माण को प्राप्त करता है संसारी आत्मा कर्म बंद से सहित है जैसा बंध वैसी आयु मिलती है धर्म से हल्के होते होते स्वर्ग मोक्ष प्राप्त कर लोगे स्वाध्याय करते हुए परिणति निर्मल करें यह जिनवाणी का सार है।

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