जैन समाचार

1000 परिवार ने अपने-अपने घर से की ऑनलाइन सम्मेद शिखरजी की वंदना*

ब्रह्मचारी सुनिल भैया के मार्गदर्शन में अनूठा आयोजन हुआ, भाव सहित पाद प्रक्षालण और गुरुजी की महापूजन भी किया गया


AHINSA KRANTI NEWS

 इंदौर। दिगम्बर जैन समाज के इतिहास में पहली बार आज गुरु पूर्णिमा पर्व अनूठे तरीक़े से मनाया गया है।  संत शिरोमणी आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज कि भक्ति करते हुए 1000 परिवार ने एक साथ एक समय पर शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखरजी की भाव वंदना की है। यह जानकारी देते हुए संयोजक राहुल सेठी और वर्षा काला ने बताया की लाकडाउन के चलते हम गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु भक्ति करने गुरुदेव के पास नहीं जा सकते थे। इसलिए समाजजन को अपने घर पर रहते हुए गुरु भक्ति करने का अनूठा प्रयास कराया गया है। आज सुबह 8.30 बजे से सम्मेद शिखर जी की ऑनलाइन वंदना करायी गयी। इस अवसर पर पर्वत पर स्थित सभी टोक (चरण पादुका) पर विधि अनुसार अर्घ चढ़ाए गए। संयोजक गोरव पाटोदी, सुयश जैन और महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष रुचि गोधा ने बताया की बाल ब्रह्मचारी सुनिल भैया जी के मार्गदर्शन में वंदना शुरू हुई थी। सभी श्रावकों को शिखर जी पर्वत की सम्पूर्ण जानकारी भी दी गयी। यह पूरा ऑनलाइन आयोजन ज़ूम क्लाउड ऐप पर लाइव हुआ। इसके साथ ही फ़ेसबुक पर भी सीधा प्रसारण अदिति-सलोनी जैन ने किया था।

ज़ूम ऐप पर 1000 परिवार ने और फ़ेसबुक पर 4000 परिवार ने ऑनलाइन वंदना की है। *आचार्य श्री की पूजा पर सभी भक्ति करने लगे*राजकुमार काला, शुभम जैन, नितेश जैन ने बताया कि वंदना पूरी होने के बाद सभी की इच्छानुसार आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की महापूजन करायी गयी थी। भक्तिमय पूजा में पूरे समय सभी समाजजन भक्ति (नरत्य) करने लगे थे। ऐसा पहली बार हुआ है की ऑनलाइन ही गुरुजी के पाद प्रक्षालण का विडियो भी सभी को दिखाया गया था।*20 तीर्थंकर की मोक्ष स्थली है*पूजा कासलीवाल, मेघना जैन और पूजा बड़जात्या ने बताया की सम्मेद शिखर जी से जैन धर्म के 20 तीर्थंकर मोक्ष गए है। ऐसी मान्यता है की जो भी व्यक्ति इस पर्वत की भाव सहित वंदना करता है उसे पशु गति नहीं होती है। फ़िलहाल क़ोरोना वायरस की वजह से समाजजन शिखर जी जा नहीं सकते है, इसलिए ऑनलाइन वंदना का आयोजन संजोया गया था।

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